जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आया | 1 November 2019

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आया Download

31 अक्टूबर 2019 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती पर दो केन्द्रशासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आ गये। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों में बदला गया हो। अब देश में कुल राज्यों की कुल संख्या 28 और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 9 हो गयी है।

जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के उप-राज्‍यपालों का शपथ ग्रहण

जम्मू-कश्मीर: गिरीश चन्‍द्र मुरमु को केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का पहला उप-राज्‍यपाल नियुक्त किया गया है। जम्‍मू कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश गीता मित्‍तल ने 31 अक्टूबर को उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

लद्दाख: राधा कृष्ण माथुर को केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाख का पहला उप-राज्‍यपाल (लेफ्टि‍नेट गवर्नर) नियुक्त किया गया है। जम्‍मू कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश गीता मित्‍तल ने 31 अक्टूबर को लेह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

जम्मू-कश्मीर राज्य का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठन

इस वर्ष पांच अगस्त को केन्द्र ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A के प्रावधानों को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया था।

पुनर्गठन कानून के मुख्य बिन्दु:

केंद्रशासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर में पुद्दुचेरी की तर्ज पर एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्‍यमंत्री होगा। जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य की विधान परिषद समाप्‍त कर दी गयी है। सीटों के पुनर्निर्धारण के बाद जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा का पुनर्गठन होगा।

लद्दाख, अंडमान और निकोबार की तर्ज पर केंद्रशासित प्रदेश होगा और सीधे उप-राज्‍यपाल द्वारा संचालित होगा। लद्दाख में एक हिल काउंसिल होगी जो उप-राज्‍यपाल के अधीन होगी।

लद्दाख और जम्‍मू-कश्‍मीर दोनों के लिए एक ही जम्‍मू-कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय होगा।

106 केंद्रीय कानून दोनों नए केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होंगे। इनमें आधार अधिनियम-2016, भारतीय दंड संहिता-1860 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 शामिल हैं।

अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग तथा अल्‍पसंख्‍यक आयोग दोनों संघ शासित प्रदेशों में बनाए जाएंगे।

28वां व्‍यास सम्‍मान: लीलाधर जगूड़ी को उनके कविता संग्रह ‘जितने लोग उतने प्रेम’ के लिए सम्मानित किया गया

हिंदी के प्रसिद्ध कवि लीलाधर जगूड़ी को 31 अक्टूबर को नई दिल्‍ली में आयोजित एक समारोह में 28वें व्‍यास सम्‍मान से अलंकृत किया गया।

‘जितने लोग उतने प्रेम’ के लिए व्यास सम्मान

लीलाधर जगूड़ी को यह सम्मान उनके कविता संग्रह ‘जितने लोग उतने प्रेम’ के लिए दिया गया है। यह कविता संग्रह वर्ष 2013 में प्रकाशित हुआ था।

लीलाधर जगूड़ी की प्रमुख कृतियाँ

कविता संग्रह: शंखमुखी शिखरों पर, नाटक जारी है, इस यात्रा में, रात अब भी मौजूद है, बची हुई पृथ्वी, घबराए हुए शब्द, भय भी शक्ति देता है, अनुभव के आकाश में चाँद, महाकाव्य के बिना, ईश्वर की अध्यक्षता में, खबर का मुँह विज्ञापन से ढँका है

नाटक: पाँच बेटे

गद्य: मेरे साक्षात्कार

कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त वेंकटचला का निधन

र्नाटक के पूर्व लोकायुक्त न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एन वेंकटचला का 30 अक्टूबर को 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की थी।

न्यायमूर्ति वेंकटचला कर्नाटक उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे थे और बाद में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने। जुलाई 2001 से 2006 तक वह कर्नाटक के लोकायुक्त रहे।

भारतीय मूल के विदेशी नागरिक को राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत पंजीकरण कराने की अनुमति दी गयी

भारत के पेंशन कोष विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने भारतीय मूल के विदेशी नागरिक को प्रवासी भारतीयों की ही तरह राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत पंजीकरण कराने की अनुमति दी है।

वित्‍त मंत्रालय के अधिसूचना के अनुसार भारतीय मूल के विदेशी नागरिक NPS के लिए पंजीकरण करा सकते हैं बशर्ते वे कानून के तहत भारत में निवेश करने के पात्र हों। ऐसे लोग अपनी जमा-पूंजी को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के दिशा-निर्देशों के तहत देश के बाहर भी ले जा सकेंगे।

अब कोई भी भारतीय नागरिक चाहे वह देश में रहता हो या विदेश में और चाहे वह भारतीय मूल का विदेशी नागरिक ही क्‍यों न हो, 65 वर्ष की उम्र तक NPS के तहत पंजीकरण करा सकता है।

तमिलनाडु अनुबंध कृषि पर कानून बनाने वाला पहला राज्य बना

मिलनाडु अनुबंध कृषि पर कानून बनाने वाला पहला राज्य बन गया है। उसने इसके लिए 30 अक्टूबर को कृषि उपज और पशुधन संविदा खेती तथा सेवा अधिनियम (Agricultural Produce and Livestock Contract Farming and Services (Promotion and Facilitation – Act) को मंजूरी दी।

इस कानून के माध्यम से बाज़ार मूल्य में उतार-चढ़ाव होने की स्थिति में किसानों के हितों की रक्षा हो सकेगी। इसके अंतर्गत खरीदारों व किसानों के मध्य हुए समझौते के तहत किसानों को पूर्व-निर्धारित मूल्य का भुगतान किया जाएगा।

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  1. Yogesh kumar gupta

    on Sunday 17th of November 2019 08:47:20 PM

    Sir mera optional sub law h please provides notes nd lecture

  2. Kumari suchita

    on Friday 8th of November 2019 03:40:39 PM

    Sir plz current affairs monthly pdf dijiye daily ka nhi

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