ग्लोबल लोकतंत्र सूचकांक में भारत फिसला, 10 स्थान गिरकर 51 वें पायदान पर पहुंचा | 23 January 2020

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वैश्विक लोकतंत्र के सूचकांक में भारत दस पायदान नीचे आ गया है। ब्रिटिश संस्थान ‘द इकोनॉमिस्ट ग्रुप’ की इकोनॉमिक इंटेलीजेंस यूनिट (ईआईयू) की ओर से जारी 2019 की सूची में भारत 51वें स्थान पर है। लोकतंत्र सूचकांक की वैश्विक सूची में भारत 10 स्थान लुढ़क कर 51वें स्थान पर आ गया है। 2018 में भारत के अंक 7.23 थे, जो घटकर 6.90 रह गए हैं।  यह वैश्विक सूची 165 स्वतंत्र देशों और दो क्षेत्रों में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति का एक खाका पेश करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नागरिकों की आजादी की स्थिति एक साल में कम हुई है। लोकतांत्रिक सूची में यह गिरावट देश में नागरिक स्वतंत्रता के ह्रास के कारण आई है। सूची में चीन 153वें स्थान पर है। नार्वे शीर्ष पर व उत्तर कोरिया सबसे नीचे है। सूचकांक सरकार का कामकाज, चुनाव प्रक्रिया व बहुलतावाद, राजनीतिक भागीदारी, राजनीतिक संस्कृति और नागरिक स्वतंत्रता पर आधारित है।

इनके कुल अंकों के आधार पर देशों को चार प्रकार के शासन में वर्गीकृत किया जाता है- ‘पूर्ण लोकतंत्र’ (8 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले), त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र (6 से ज्यादा लेकिन 8 या 8 से कम अंक वाले), संकर शासन (4 से ज्यादा लेकिन 6 या 6 से कम अंक हासिल करने वाले) और सत्तावादी शासन (4 या उससे कम अंक वाले)। भारत को ‘त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र’ में शामिल किया गया है।

इस बीच चीन 2019 में गिरकर 2.26 अंकों के साथ अब 153वें पायदान पर है। यह वैश्विक रैंकिंग में निचले पायदान के करीब है। उभरती हुई दूसरी अर्थव्यवस्थाओं में ब्राजील 6.86 अंक के साथ 52वें पायदान पर है, रूस 3.11 अंक के साथ सूची में 134वें स्थान पर है। इस बीच पाकिस्तान कुल 4.25 अंकों के साथ सूची में 108वें स्थान पर है, श्रीलंका 6.27 अंकों के साथ 69वें और बांग्लादेश 5.88 अंकों के साथ 80वें स्थान पर है। नार्वे इस सूची में शीर्ष पर है जबकि उत्तर कोरिया 167वें स्थान के साथ सबसे नीचे है।

भारत और ब्राजील के बीच  भू-गर्भशास्त्र और खनन संसाधनों के क्षेत्र में हुआ समझौता

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22 जनवरी 2020 को भू-गर्भशास्त्र एवं खनन संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग पर भारत सरकार के खनन मंत्रालय के मातहत भारतीय भू-गर्भ सर्वेक्षण और ब्राजील सरकार के खनन एवं ऊर्जा मंत्रालय में ब्राजील भू-गर्भ सर्वेक्षण-सीपीआरएम के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए अपनी मंजूरी दी है।

यह समझौता भारत सरकार के खनन मंत्रालय के तहत भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण और ब्राजील सरकार के खनन एवं ऊर्जा मंत्रालय में ब्राजील भूगर्भ सर्वेक्षण-सीपीआरएम के बीच एक संस्थानिक व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।

शिशु देखभाल के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन :

शिशु देखभाल के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और ब्राजील के नागरिकता मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को भी मंजूरी दी गयी । इस समझौते से दोनों देशों के बीच दोस्ती का बंधन मजबूत होगा और शिशुओं की देखभाल के मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ेगा। दोनों देश इस क्षेत्र में अपने यहां चल रहे बेहतर तरीकों का आदान-प्रदान कर लाभान्वित हो सकेंगे.

भारत और ब्राजील के बीच तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में समझौता ज्ञापन :

तेल और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और ब्राजील के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को को भी मंजूरी दी गयी । इस समझौता ज्ञापन से भारत और ब्राजील के बीच तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। इस समझौते के तहत दोनों पक्ष भारत और ब्राजील में ईएंडपी पहलों में सहयोग स्थापित करने, इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास, ब्राजील, भारत एवं तीसरी दुनिया के देशों में द्रवित प्राकृतिक गैस (एलएनजी) परियोजनाओं में सहयोग की संभावनाएं तलाशने और ऊर्जा क्षमता,  ऊर्जा अनुसंधान विकास एवं क्षेत्रीय ऊर्जा संरचना नेटवर्क के विस्तार जैसी ऊर्जा नीतियों सहित तेल ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 32वें ‘प्रगति’ बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी 2020 को, वर्ष 2020 की  पहली ‘प्रगति’ (PRAGATI) बैठक की अध्यक्षता की।

यह प्रधानमंत्री की प्रगति के माध्यम से 32 सेकंड की बातचीत को चिन्ह्ति करती है।

प्रगति केन्द्र और राज्य सरकार को शामिल करते हुए सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन के लिए आईसीटी आधारित मल्टी-मॉडल मंच ( Pro-Active Governance and Timely Implementation ) है।

11 बातों पर चर्चा :

प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री ने 11 बातों पर चर्चा की। इसमें से 9 देरी हुई परियोजनाएं हैं। यह 9 परियोजनाएं 24,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की है और 9 राज्यों- ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश तथा तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में फैली हैं। इन परियोजनाओं में 3 रेल मंत्रालय, 5 सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और 1 पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की हैं।

इस बैठक में प्रधानमंत्री ने वित्तीय सेवाओं के विभाग के तहत बीमा योजनाओं जैसे ‘प्रधानमंत्री जीवनज्योति बीमा योजना’ (पीएमजेजेबीवाई) और ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ (पीएमएसबीवाई) से संबंधित शिकायतों के बारे में हुए कार्य प्रदर्शन की समीक्षा की।

प्रधानमंत्री ने अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली (सीसीटीएनएस) परियोजना के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की। यह परियोजना ई-शासन के माध्यम से प्रभावी पुलिस व्यवस्था के लिए एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली है।

पिछले 31 प्रगति विचार-विमर्शों में प्रधानमंत्री ने 12.30 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश वाली 269 परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने विविध क्षेत्रों के 47 सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं से संबंधित शिकायत निवारण समाधान की भी समीक्षा की।

प्रधानमंत्री ने 25 मार्च, 2015 को बहुउद्देश्यीय और बहुविषयक शासन मंच ‘प्रगति’ (PRAGATI – the ICT based multi-modal platform for Pro-Active Governance and Timely Implementation ) की शुरूआत की थी।

‘प्रगति’ एकीकृत संवाद मंच है, जिसका उद्देश्य जन-साधारण की शिकायतों का समाधान करना है। ‘प्रगति’ के जरिए भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और परियोजनाओं तथा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा शुरू की जाने वाली परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा में मदद मिलती है।

‘व्योमित्र’ नामक ह्यूमनॉइड रोबोट को प्रदर्शित किया:इसरो

हाल ही में इसरो ने ‘व्योमित्र’ नामक ह्यूमनॉइड रोबोट को प्रदर्शित किया। यह रोबोट इंसानों की तरह बात करती है, इसे गगनयान को लांच करने से पहले अन्तरिक्ष में भेजा जाएगा।

मिशन गगनयान

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने मिशन गगनयान के लिए दिसम्बर, 2021 को डेडलाइन निश्चित की है। गगनयान के लिए अन्तरिक्षयात्रियों का शुरूआती प्रशिक्षण भारत में ही किया जायेगा, बाद में एडवांस्ड प्रशिक्षण रूस में भी किया जा सकता है। हाल ही में केन्द्रीय कैबिनेट ने मिशन गगनयान के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट को भी मंजूरी दी थी। इस मिशन में तीन अन्तरिक्षयात्रियों को अन्तरिक्ष में 5-7 दिनों के लिए अन्तरिक्ष में भेजा जायेगा। भारत ऐसा कारनामा करने वाला चौथा देश बनेगा।

गगनयान मिशन की लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये आएगी। यह मिशन पूर्ण रूप से स्वदेशी होगा। इस मिशन के वास्तविक लांच से पहले इसरो बिना मानव के दो मिशन लांच करेगा, पहला मिशन 30 महीने में तथा दूसरा मिशन 36 महीने बाद लांच किया जायेगा।

गगनयान मिशन के लिए GLSV Mk-III लांच व्हीकल का उपयोग किया जायेगा। मिशन गगनयान के स्पेस क्राफ्ट में एक क्रू मोड्यूल तथा एक सर्विस मोड्यूल होगा। इसका भार लगभग 7 टन होगा। इस मिशन में तीन अन्तरिक्ष यात्रियों को 5-7 दिन के लिए अन्तरिक्ष में भेजा जायेगा। इस स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की कक्षा में 300-400 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जायेगा। क्रू मोड्यूल का आकार 3.7 मीटर तथा सर्विस मोड्यूल का आकार 7 मीटर होगा।

इस मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से लांच किया जायेगा। यह स्पेसक्राफ्ट 16 मिनट में अपेक्षित ऊंचाई पर पहुँच जायेगा। इस मिशन के लिए क्रू का चयन भारतीय वायुसेना व इसरो द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। बाद में इस क्रू को 2-3साल तक प्रशिक्षण दिया जायेगा।

वापसी के लिए मोड्यूल के वेग को कम किया जाएगा और इसे विपरीत दिशा में घुमाया जायेगा। जब यह पूरा मोड्यूल पृथ्वी की सतह से 120 किलोमीटर की दूरी पर पहुंचेगा तो सर्विस मोड्यूल को अलग किया जायेगा। केवल क्रू वाला मोड्यूल ही पृथ्वी पर पहुंचेगा। इसे पृथ्वी पर पहुँचने में लगभग 36 मिनट लगेंगे। इसरो क्रू मोड्यूल को गुजरात के निकट अरब सागर अथवा गुजरात की खाड़ी में लैंड करवाने की योजना बना रहा है।

इस मिशन को भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस से लगभग 6 महीने पहले क्रियान्वित किया जायेगा।

गगनयान के लिए इसरो द्वारा विकसित तकनीक

इसरो अन्तरिक्ष में मानव भेजने के लिए महत्वपूण तकनीकों का परिक्षण कर रहा है। इस मिशन को 10,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जायेगा। इसके लिए कई उपकरण तैयार किये जा चुके हैं। इसके लिए हैवी लिफ्ट लांच व्हीकल GSLV मार्क-III, रिकवरी टेक्नोलॉजी, क्रू मोड्यूल, अन्तरिक्ष यात्री प्रशिक्षण व्यवस्था, वातावरण नियंत्रण तथा लाइफ सपोर्ट सिस्टम का सफलतापूर्वक निर्माण कर लिया गया है। दिसम्बर, 2014 में GSLV मार्क-III का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। इसके बाद जून 2017 में GSLV मार्क-III की पहली डेवलपमेंटल उड़ान सफलतापूर्वक भरी थी। जुलाई, 2018 में क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया था। अभी भी कुछ एक टेक्नोलॉजी व उपकरणों का निर्माण किया जाना बाकी है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की विकास दर के अनुमान को घटाकर 4.8% किया

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मौजूदा वित्त वर्ष  के लिए विकास दर के अनुमान को घटाकर 4.8% किया, इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 2019-20 में भारत की विकास दर 6.1% रहने का अनुमान लगाया था। 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 5.8% रहेगी। 2021-22 में भारत की विकास दर 6.5% रहने के आसार हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो वैश्विक स्तर पर आर्थिक सहयोग, आर्थिक सुदृढ़ता, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा धारित विकास पर बल देती है। इसकी स्थापना 27 दिसम्बर, 1945 को की गयी थी। वर्तमान में 189 देश इसके सदस्य हैं।

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