भारत सरकार ने ऐतिहासिक बोडो समझौते पर हस्ताक्षर किये | 28 January 2020

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भारत सरकार ने ऐतिहासिक बोडो समझौते पर हस्ताक्षर किये, यह समझौते नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (NDFB) के 9 धड़ों के साथ हुआ है। इस समझौते के अनुसार बोडोलैंड टेरीटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट में स्थानीय लोगों के लिए विशेष अधिकार होंगे। इस क्षेत्र में बाहरी लोगों को काम करने के लिए परमिट हासिल करना होगा।

त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर:

त्रिपक्षीय समझौते पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी के चार गुटों के नेतृत्व, एबीएसयू, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग तथा असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये।

बोडो समझौते की मुख्य विशेषताएं:

  • केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समझौता है। उन्होंने यह दावा भी किया कि इससे बोडो मुद्दे का व्यापक हल मिल सकेगा।
  • गृहमंत्री ने बताया कि बोडोलैंड आंदोलन के 1550 कैडर अपने 130 हथियारों के साथ 30 जनवरी को सरेंडर करेंगे। गृहमंत्री ने कहा कि बोडो समुदाय के लोगों के समावेशी विकास का प्रयास किया जाएगा।
  • गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थिरता आई है और समावेशी विकास की राह पर क्षेत्र चला है।
  • इस समझौते के बाद केंद्र सरकार को उम्मीद है कि एक संवाद और शांति प्रकिया के अंतर्गत उग्रवादियों का मुख्य धारा में शामिल करने का सिलसिला शुरू होगा।
  • इस समझौते के अंतर्गत इस गुट के सदस्यों को आर्थिक सहायता भी सरकार की ओर से मुहैया करवाई जाएगी, इसकी मांग ये गुट पिछले कई दिनों से कर रहा था।
  • केंद्र सरकार ने इस समझौते से पहले ये साफ किया है कि असम की एकता बरकरार रहेगी तथा उसकी सीमाओं में कोई बदलाव नहीं होगा।

बोडो विवाद क्‍या है?

  • असम में बोडोलैंड का मुद्दा तथा इससे जुड़ा विवाद छह दशक पुराना है। बोडो ब्रह्मपुत्र घाटी के उत्तरी हिस्से में बसी असम की सबसे बड़ी जनजाति है। वे साल 1960 से अपने लिए अलग राज्य की मांग करती आई है। बोडो का कहना है कि उसकी जमीन पर दूसरे समुदायों की अनाधिकृत मौजूदगी बढ़ती जा रही है जिससे उसकी आजीविका एवं पहचान को खतरा है।
  • साल 1980 के बाद बोडो आंदोलन हिंसक होने के साथ तीन धाराओं में बंट गया था। नेशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) ने पहली धारा का नेतृत्व किया जो अपने लिए अलग राज्य चाहता था। दूसरा संगठन बोडोलैंड टाइगर्स फोर्स (बीटीएफ) है जिसने ज्यादा स्वायत्तता की मांग की। तीसरा ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) था जिसने समस्या के राजनीतिक समाधान की मांग की।

लक्जरी वस्तुओं के लिए दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में मुम्बई, हांगकांग सबसे महंगा

स्विस निजी बैंक जूलियस बेयर द्वारा जारी पहला ‘ग्लोबल वेल्थ एंड लाइफस्टाइल रिपोर्ट 2020 के अनुसार, भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई को विलासिता  के लिए दुनिया के 28 सबसे महंगे शहरों की सूची में अंतिम ( 28 वां ) स्थान दिया गया ।

शीर्ष 5: शंघाई (चीन), टोक्यो (जापान), न्यूयॉर्क (अमेरिका) और सिंगापुर के बाद सूची में हांगकांग दुनिया का सबसे महंगा शहर था।

रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक रूप से 10 सबसे अमूल्य शहरों में से 5 के लिए एशियाई क्षेत्र हांगकांग के बाद, इसमें शंघाई, टोक्यो, सिंगापुर और ताइपे शामिल हैं और यह संपत्ति, कारों, एक बिजनेस क्लास फ्लाइट, फाइन डाइनिंग, के लिए मूल्य टैग के लिए सबसे महंगा क्षेत्र है, एक शादी का भोज और सौंदर्य सेवाएं।

लक्जरी कार खरीदने के लिए 10 सबसे महंगे क्षेत्र में से 8 एशिया में , जिसकी रिपोर्ट में उच्च आयात करों को जिम्मेदार ठहराया गया ।

सबसे सस्ता मुंबई (महाराष्ट्र) भी एशिया में है। यहां,  पुरुषों के सूट, शादी के दावत और व्यक्तिगत प्रशिक्षक सभी सबसे सस्ते हैं। भारत का लग्जरी गुड्स मार्केट सालाना 6% बढ़ने का है, जिसका वैल्यू लगभग 8।3 बिलियन डॉलर प्रतिवर्ष है।

यूरोपीय क्षेत्र उच्च अंत वस्तुओं और सेवाओं के लिए सबसे उचित मूल्य प्रदान करता है क्योंकि लंदन (यूनाइटेड किंगडम) यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका (ईएमईए) में सबसे अमूल्य शहर है। लंदन दुनिया में 3 सबसे महंगी संपत्ति बाजार है।

जूलियस बेयर द्वारा विश्लेषण किए गए दुनिया भर के 28 शहरों में शामिल हैं; एशिया में 10, यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका में 12 (EMEA) और अमेरिका में 6।यह सर्वेक्षण होम, एक्सपेरिएनल, फैशन, फैमिली और वेलनेस सहित 5 प्रमुख श्रेणियों के व्यापक स्पेक्ट्रम में 18 लग्जरी सामानों की कीमत की तुलना पर आधारित था।इसने घड़ियों, महिलाओं के हैंडबैग, पुरुषों के सूट और पियानो और आवासीय संपत्ति, आभूषण, कारों सहित विभिन्न प्रकार की लक्जरी वस्तुओं और सेवाओं के लिए मूल्य रुझानों को ट्रैक किया।

31 जनवरी को EU से अलग हो जाएगा ब्रिटेन: महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने ब्रेक्जिट बिल को दी मंजूरी

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 23 जनवरी 2019 को ब्रिटिश सरकार के ब्रेक्जिट कानून को मंजूरी दे दी है।  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के ब्रेक्जिट विधेयक को ब्रिटेन की संसद ने 22 जनवरी 2020 को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही 31 जनवरी को ब्रिटेन यूरोपीय संघ (EU) से बाहर निकल जायेगा। इसके साथ ही ब्रेक्जिट विधेयक अब कानून बनने के लिए तैयार है।

ब्रिटेन संसद का निचला सदन सदन हाउस ऑफ कॉमंस 09 जनवरी 2020 को ईयू से निकलने से संबंधित ब्रेग्जिट विधेयक पर अपनी मुहर लगा चुका था। अब संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भी इस बिल को मंजूरी मिल गई है। इसी के साथ ब्रिटेन के 31 जनवरी को यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह कदम ऐतिहासिक है, क्योंकि यह समझौता ब्रिटिश संसद में एक साल से अधिक समय से अटका हुआ था।

ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन (EU) से अलग होने वाला पहला देश बन जाएगा। ब्रेक्जिट समझौते के पक्ष में 330 वोट जबकि विरोध में 231 वोट पड़े थे। ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमंस ने 09 जनवरी 2020 को प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के ईयू से अलग होने के समझौते को 231 के मुकाबले 330 मतों से मंजूरी प्रदान कर दी। ब्रेक्जिट पर सांसदों की मंजूरी के बाद ब्रिटेन के 31 जनवरी को यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

ग्रैमी पुरस्कार 2020

हाल ही में ग्रैमी पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा की गयी, इस वर्ष के प्रमुख विजेता निम्नलिखित हैं :

बेस्ट रैप एल्बम :IGOR (टाइलर, द क्रिएटर)

बेस्ट रैप परफॉरमेंस : रैक्स इन द मिडल (निपसी हसल, रोडी रिच, हिट बॉय)

बेस्ट रैप सॉंग : ए लॉट (21 सेवेज, जे. कोल)

बेस्ट R&B एल्बम : वेंचुरा (एंडरसन)

बेस्ट R&B सॉंग :  से सो (पी.जे. मॉर्गन)

बेस्ट रॉक सॉंग : दिस लैंड (गैरी क्लार्क जूनियर)

बेस्ट कंट्री एल्बम : व्हाइल आई एम लिविंग (तान्या टकर)

बेस्ट कॉमेडी एल्बम : स्टिक्स एंड स्टोंस (डेव चैपल)

बेस्ट म्यूजिक विडियो : ओल्ड टाउन रोड (लिल नास, बिली रे सायरस)

बेस्ट रेगेयी एल्बम : रैपचर (कॉफ़ी)

बेस्ट स्पोकन वर्ड एल्बम : बिकमिंग (मिशेल ओबामा)

बेस्ट वर्ल्ड म्यूजिक एल्बम : सेलिया (एंजलिक किड्जो)

ग्रैमी अवार्ड

ग्रैमी अवार्ड संगीत के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है, यह पुरस्कार ‘द रिकॉर्डिंग अकैडमी’ द्वारा दिया जाता है। पहली बार 4 मई, 1959 को ग्रैमी अवार्ड प्रदान किया गया था।

आंध्र प्रदेश विधानपरिषद को समाप्त करने के लिए मंज़ूरी दी

आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने विधानपरिषद को समाप्त करने के लिए मंज़ूरी दी। गौरतलब है कि हाल ही में विधानपरिषद ने दो बिलों को लटकाया था, इसमें  आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण निरस्तीकरण बिल तथा विकेन्द्रीकरण बिल शामिल थे।

राज्य विधानपरिषद:

आंध्र प्रदेश देश के उन चुनिन्दा राज्यों में से एक है जहाँ पर विधानपरिषद मौजूद है, इसके अलावा बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना  में भी विधानपरिषद मौजूद है।

संवैधानिक व्यवस्था:

अनुच्छेद 169 में विधानपरिषद को परिभाषित किया गया है। नवम्बर, 2019 में 6 राज्यों में विधानपरिषद मौजूद थी। राज्यों की विधानपरिषद के सदस्यों का चुनाव निम्नलिखित विधि से किया जाता है :

एक तिहाई सदस्यों का चयन स्थानीय निकायों जैसे ग्राम पंचायत, नगर पालिका तथा जिला परिषद के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

एक तिहाई सदस्यों को राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुना जाता है।

1/6 सदस्यों को राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।

1/12 सदस्यों को  स्नातकों द्वारा चुना जाता है जो राज्य में पिछले तीन साल से रह रहे हैं।

1/12 सदस्यों को राज्य के अध्यापकों (सेकेंडरी स्कूल, महाविद्यालय व विश्वविद्यालय) द्वारा चुना जाता है।

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