सफदरजंग अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी सुविधा शुरू की गयी | 5 November 2019

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हाल ही में नई दिल्ली में सफदरजंग अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी फैसिलिटी शुरू की गयी है। यह केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन देश के सबसे बड़े तृतीयक रेफरल सेंटर में से एक है।

यह देश का पहला सरकारी अस्पताल है जहां रोबोटिक सर्जरी फैसिलिटी आरंभ किया गया है। प्रोस्टेट, गुर्दे और ब्लैडर के कैंसरों तथा गुर्दे के नाकाम होने की स्थिति में सभी गरीब मरीजों के लिए यह सुविधा निःशुल्क होगी।

रोबोट से होने वाली सर्जरी में चीरा कम लगाना पड़ता है जिससे गंभीर रूप से बीमार लोगों, कैंसर पीड़ितों और गुर्दे की नाकामी के शिकार रोगियों की मृत्यु-दर काफी कम हो जाती है।

इस पद्धति से आपरेशन में कम समय लगता है और थोड़े वक्त में ही अधिक रोगियों का इलाज कर पाना संभव होता है। रोबोट की सहायता से 25 आपरेशन पहले की किये जा चुके हैं।

सफदरजंग अस्पताल में युवा चिकित्सकों के लिए राष्ट्रीय रोबोटिक प्रशिक्षण केन्द्र भी स्थापित किया गया है।

तवांग महोत्सव 2019

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में तवांग महोत्सव संपन्न हुआ। यह अरुणाचल प्रदेश का एक वार्षिक उत्सव है जिसकी शुरुआत वर्ष 2012 में की गई थी।

महोत्सव में अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जिसमें बौद्ध धर्म से जुड़े कार्यक्रम, पारंपरिक नृत्य, देशी खेल, फिल्में और वृत्तचित्र (Documentaries) आदि का प्रदर्शन किया जाता है।

इसकी शुरुआत एक धार्मिक परंपरा सेबंग (Sebung) से की जाती है जिसके अंतर्गत भिक्षुओं को रैलियों के रूप में तवांग मठ से तवांग शहर के उत्सव स्थल तक जाना होता है।

महोत्सव का मुख्य आकर्षण याक नृत्य और अजी-लामू नृत्य हैं।

5वाँ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव-2019

कोलकाता में 4 दिवसीय (5 नवंबर से 8 नवंबर) 5वाँ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव-2019 (Fifth India International Science Festival-2019- IISF) का आयोजन किया जाएगा। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों एवं विभागों और विज्ञान भारती द्वारा आयोजित यह एक वार्षिक आयोजन है।

IISF-2019 का मुख्य उद्देश्य जनसाधारण के बीच विज्ञान के प्रति जागरूकता का प्रसार करना तथा पिछले कुछ वर्षों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत का योगदान और लोगों को इससे प्राप्त लाभों को प्रदर्शित करना है। इसका लक्ष्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समावेशी विकास हेतु रणनीति तैयार करना है।

महोत्सव के एक मुख्य आकर्षण:

छात्र विज्ञान गाँव- इसमें देश के विभिन्न हिस्सों के करीब 2500 स्कूली विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है।

युवा वैज्ञानिक सम्मेलन- इस कार्यक्रम में शामिल युवा वैज्ञानिक और शोधकर्त्ता, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों तथा प्रौद्योगिकीविदों से सीधा संवाद कर सकेंगे।

विज्ञानिक- इसके अंतर्गत विज्ञान संचार की अनेक विधाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।

इसके अलावा महिला वैज्ञानिक एवं उद्यमियों की सभा के अंतर्गत महिलाओं में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता विकास से जुड़े नए अवसरों की खोज की जाएगी।

आरम्भ: सिविल सेवा का सर्वप्रथम फाउंडेशन पाठ्यक्रम

भारत सरकार ने गुजरात के केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में सिविल सेवकों के लिए “आरम्भ” नामक पहला आम फाउंडेशन कोर्स शुरू किया है। लगभग 500 नए भर्ती हुए नौकरशाहों को छह दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम में भारत सरकार ने “Nurture the Future” भी शुरू किया। इस कार्यक्रम के तहत केवडिया में गांवों का दौरा करने के लिए सिविल सेवकों को टीमों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक पर्यवेक्षक एक युवा को कैरियर और पेशेवर मार्गदर्शन प्रदान करेगा। यह पहल युवाओं के लिए बेहतर और उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करेगी।

स्टैच्यु ऑफ यूनिटी:

  • यह सरदार वल्लभाई पटेल की एक विशाल मूर्ति है।
  • यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है।
  • यह नर्मदा नदी के तट पर स्थित है।
  • सरदार पटेल भारत के 552 रियासतों को एकजुट करने में अपने नेतृत्व के लिए बहुत सम्मानित हैं।

कानपुर विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर

गिनीज़ वर्ल्ड रिकार्ड्स के नवीनतम संस्करण के अनुसार उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर विश्व का सबसे अधिक प्रदूषित शहर है। इसका प्रकाशन प्रतिवर्ष पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा किया जाता है। इस वर्ष इस पुस्तक में भारतीयों द्वारा 80 रिकॉर्ड बनाये गये हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विश्लेषण के मुताबिक कानपूर विश्व का सबसे प्रदूषित शहर है, 2016 में यहाँ पर PM 2.5 का स्तर 173 माइक्रोग्राम/घन मीटर है। PM 2.5 का यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित अधिकतम स्तर 10 माइक्रोग्राम/घन मीटर से 17 गुणा अधिक है।

PM 2.5

पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में जीवाश्म ईंधनों का सर्वाधिक योगदान होता है। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधनों का अनियंत्रित दहन है। डीज़ल से चलने वाले सार्वजनिक परिवहन, वाहन तथा शक्ति संयंत्र वायु प्रदूषण के एक अन्य प्रमुख कारण होते हैं। पार्टिकुलेट मैटर कण का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है। पार्टिकुलेट मैटर काफी महीन कण होते हैं, ज्यादा समय तक इसके प्रभाव में रहने से कैंसर, ह्रदय तथा फेफड़ों के रोग हो सकते हैं।

राधाकृष्ण माथुर लद्दाख के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर बने

राधाकृष्ण माथुर लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर बन गये हैं, पूर्व आईएएस अफसर गिरीश चन्द्र मुर्मू को जम्मू-कश्मीर का प्रथम लेफ्टिनेंट गवर्नर किया गया है। गौरतलब है कि 31 अक्टूबर, 2019 को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आ गये हैं।

राधाकृष्ण माथुर 1977 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वे नवम्बर, 2018 में प्रमुख सूचना आयुक्त से पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने रक्षा सचिव, रक्षा उत्पादन सचिव, केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योग सचिव तथा त्रिपुरा के मुख्य सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं।

गिरीश चन्द्र मुर्मू इससे पहले वित्त मंत्रालय में व्यय सचिव के रूप में कार्यरत्त थे, वे गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय गिरीश चन्द्र मुर्मू उनके प्रधान सचिव थे।

चन्द्रमा के बाह्यमंडल में आर्गन 40 की खोज की गयी

चंद्रयान 2 ने चन्द्रमा के बाह्यमंडल में आर्गन 40 की खोज की। आर्गन 40 आर्गन का एक आइसोटोप है। इसरो ने आर्गन 40 के चन्द्रमा के बाह्यमंडल में पहुँचने की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन किया है। यह पोटैशियम-40 के रेडियोएक्टिव विखंडन से उत्पन्न होता है।

CHACE-20 चंद्रयान- 2 ऑर्बिटर में लगा हुआ एक पेलोड है, यह न्यूट्रल गैस स्पेक्ट्रोमीटर है। इस उपकरण ने 100 किलोमीटर की ऊंचाई से आर्गन 40 का पता लगाया है। चन्द्रमा में रात के दौरान गैस बाहयमंडल में संघनित होती है।

मिशन चंद्रयान-2:

चंद्रयान-2 भारत का चंद्रमा पर दूसरा मिशन है, यह भारत का अब तक का सबसे मुश्किल मिशन है। यह 2008 में लांच किये गए मिशन चंद्रयान का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान मिशन ने केवल चन्द्रमा की परिक्रमा की थी, परन्तु चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा की सतह पर एक रोवर भी उतारा जाना था।

इस मिशन के सभी हिस्से इसरो ने स्वदेश रूप से भारत में ही बनाये हैं, इसमें ऑर्बिटर, लैंडर व रोवर शामिल है। इस मिशन में इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड रोवर को उतारने की कोशिश की। यह रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके चन्द्रमा की सतह के घटकों का विश्लेषण करने के लिए निर्मित किया गया था।

चंद्रयान-2 को GSLV Mk III से लांच किया गया। यह इसरो का ऐसा पहला अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमे इसरो ने किसी अन्य खगोलीय पिंड पर रोवर उतारने का प्रयास किया। इसरो के स्पेसक्राफ्ट (ऑर्बिटर) का वज़न 3,290 किलोग्राम है, यह स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा की परिक्रमा करके डाटा एकत्रित करेगा, इसका उपयोग मुख्य रूप से रिमोट सेंसिंग के लिए किया जा रहा है।

6 पहिये वाला रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी व चट्टान के नमूने इकठ्ठा करने के लिए बनाया गया था, इससे चन्द्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ तथा हाइड्रॉक्सिल और जल-बर्फ के चिन्ह के बारे में जानकारी मिलने की सम्भावना थी।

चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग  इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा था, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं। इजराइल का स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर क्रेश हो गया था।

 

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