राष्ट्रीय जलमार्ग -2: ब्रह्मपुत्र पर कंटेनर कार्गो अबतक की पहली आवाजाही | 6 November 2019

राष्ट्रीय जलमार्ग -2: ब्रह्मपुत्र पर कंटेनर कार्गो अबतक की पहली आवाजाही Download

शिपिंग मंत्रालय ने हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (राष्ट्रीय जलमार्ग -1) से पांडु, गुवाहाटी (राष्ट्रीय जलमार्ग -2) तक जलमार्ग पर जाने के लिए एक लैंडमार्क कंटेनर कार्गो खेप को हरी झंडी दिखाई। मंत्रालय ने पेट्रोरसायन, खाद्य तेल और पेय पदार्थ आदि के 53 टीईयू (कंटेनर) लेकर चलने वाले अंतर्देशीय पोत एमवी माहेश्वरी को हरी झंडी दिखाई।

यह समुद्री यात्रा 12-15 दिनों की राष्ट्रीय जलमार्ग -1 (गंगा नदी), राष्ट्रीय जलमार्ग-97 (सुंदरबन), भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (आईबीपी) मार्ग तथा राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र नदी) के बरास्ते एक एकीकृत आईडब्ल्यूटी आवाजाही होगी।

इससे होने वाले लाभ

  • इस अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) मार्ग पर यह पहला कंटेनरीकृत कार्गो आवाजाही है। जलमार्गों के द्वारा कच्चे माल से लेकर तैयार अंतिम उत्पादों की ढुलाई कम खर्चीला है क्योंकि नदियां, नहरें तथा समुद्र में उपलब्ध पानी की गहराई प्राकृतिक है।
  • इस 1425 किलोमीटर लंबी आवाजाही से इन विविध जलमार्गों का उपयोग करके आईडब्ल्यूटी मोड की तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता स्थापित किये जाने की उम्मीद है।
  • इस नवीनतम आईडब्ल्यूटी आवाजाही का मुख्य उद्देश्य कच्चे माल और तैयार माल के परिवहन हेतु एक वैकल्पिक मार्ग खोलने के द्वारा उत्तर पूर्व क्षेत्र के औद्योगिक विकास को बढ़ावा प्रदान करना है।

राष्ट्रीय जलमार्ग -2

राष्ट्रीय जलमार्ग -2 असम के सदिया-धुबरी क्षेत्रों के बीच स्थित है। भारत में, 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अनुसार राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। इसके नौ अस्थायी टर्मिनल- डिब्रूगढ़, साखोवा, जोगीगोपा, धुबरी पोर्ट, सिलघाट, जामुगुरी, बोगीबिल, तेजपुर और सदिया हैं। राष्ट्रीय जलमार्ग -2 में पांडु बंदरगाह सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 ब्रहमपुत्र नदी पर 891 किलोमीटर लंबा सदिया और धुबरी के बीच है।

भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (IBP) क्या है?

भारत और बांग्लादेश के बीच एक अंतर्देशीय जल पारगमन और व्यापार समझौता मौजूद है। इस समझौता के तहत एक देश के अंतर्देशीय जलयान दूसरे देश के विनिर्दिष्ट मार्गों से पारगमन कर सकते हैं। हाल के दिनों में भारत और बांग्लादेश ने जलमार्गों के उपयोग को बढ़ाने हेतु बड़े कदम उठाए हैं। इनमें भारत में कोलाघाट में पीआईडब्ल्यूटी एंड टी, धुलियान, माया, सोनमुरा और बांग्लादेश में चिलमारी, राजशाही, सुल्तानगंज, दौखंडी में अतिरिक्त पोर्ट ऑफ कॉल की घोषणा पर समझौता शामिल है।

बांग्लादेश में चटगांव और मोंगला बंदरगाहों के जरिये भारत से माल की आवाजाही को सुगम बनाने हेतु एक एसओपी पर दोनों देशों द्वारा 5 अक्टूबर 2019 को हस्ताक्षर किए गए हैं। इन दोनों बंदरगाहों की निकटता से संभारतंत्र लागत में कमी आयेगी तथा उत्तर पूर्व राज्यों की व्यापार प्रतिस्पर्धा में भी सुधार होगा।

वॉएजर-2: सूर्य की सीमा के पार पहुंचने वाला दूसरा यान बना

मेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का वॉएजर-2 (Voyager 2) सूर्य की सीमा के पार पहुंचने वाला इतिहास का दूसरा अंतिरक्ष यान बन गया है। नासा के नाम एक और बहुत बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। नासा का वॉएजर-2 यान चार दशक से लंबे सफर के बाद सौरमंडल की परिधि के बाहर पहुंचने वाला दूसरा यान बन गया है।

नासा का ही वॉएजर-1 इससे पहले इस सीमा के पार पहुंचा था। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के शोधकर्ताओं के अनुसार, वॉएजर-2 इंटरस्टेलर मीडियम (आइएसएम) में पहुंच गया है। विज्ञान पत्रिका नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वॉएजर-2 ने 05 नवंबर 2018 को आइएसएम में प्रवेश किया था।

आइएसएम क्या है?

सूर्य से बाहर की तरफ बहने वाली हवाओं से सौरमंडल के चारों तरफ एक बुलबुले जैसा घेरा बना हुआ है। इस घेरे को हेलियोस्फेयर तथा इसकी सीमा से बाहर के अंतरिक्ष को इंटरस्टेलर मीडियम (आइएसएम) कहा जाता है।

आइएसएम में वॉएजर-2

यह निष्कर्ष यान पर लगे प्लाज्मा वेव उपकरण से मिली प्लाज्मा घनत्व की रीडिंग के आधार पर निकाला गया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि प्लाज्मा की बढ़ी हुई घनत्व अंतरिक्ष यान की ठंडी और उच्च प्लाज्मा घनत्व में मौजूदगी का स्पष्ट प्रमाण है। इंटरस्टेलर स्पेस एक ऐसा स्थान है जहां सौर हवाओं का गर्म और कम घनत्व वाला प्लाज्मा हमेशा बना रहता है।

वॉएजर-2 से जिस तरह के प्लाज्मा घनत्व के डाटा मिले हैं, उसी तरह के डाटा वॉएजर-1 से भी मिले थे, जब उसने आइएसएम में प्रवेश किया था। वॉएजर-1 ने साल 2012 में सूर्य की सीमा को पार किया था।

वॉएजर-2 के बारे में

 

  • वॉएजर-2 एक अमेरिकी मानव रहित अंतरग्रहीय शोध यान है। वॉएजर-2 को 20 अगस्त 1977 को नासा द्वारा प्रक्षेपित किया गया था।
  • वॉएजर-2 काफी कुछ अपने पहले वाले संस्करण यान वॉएजर-1 के समान ही था। वॉएजर-2 की चाल 57,890 किलोमीटर प्रतिघंटा है।
  • दोनों यान को उद्देश्य और पथ में अंतर के साथ धरती से परे ग्रहों व अंतरिक्ष के अध्ययन के लिए लांच किया गया था। पिछले 42 साल से दोनों यान काम कर रहे हैं।

हेलियोस्फेयर क्या है?

वॉएजर-2 पर लगे उपकरणों से हेलियोस्फेयर को समझने की दिशा में अन्य कई अहम जानकारियां भी मिल रही हैं। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यान पर लगे भिन्न-भिन्न उपकरणों से प्राप्त डेटा का आकलन कर यह निर्धारित किया कि इस मिशन ने 5 नवंबर को हेलियोस्फेयर के अंतिम छोर को पार किया है।

यह हैलियोपाउज़ नामक एक ऐसा स्थान है जहाँ कमज़ोर, गर्म सौर हवा तारों के बीच के ठंडे तथा घने माध्यम से मिलती है। इसे सौरमंडल का छोर भी कहा जाता है। सूर्य से निकलने वाली चुंबकीय रेंज एक ऐसे गैसीय वातावरण का संरचना करती है जो ग्रहों की कक्षाओं से बहुत दूर तक फैली हुई हो। यह चुंबकीय क्षेत्र ही हेलियोस्फेयर है। हेलियोस्फेयर एक लंबे वात शंकु के आकार का होता है।

RKFC पर बनी एक डॉक्युमेंट्री को BAFTA 2019 पुरस्कार दिया गया

रियल कश्मीर फुटबॉल क्लब (RKFC) पर बनी एक डॉक्युमेंट्री को प्रतिष्ठित ‘ब्रिटिश अकैडमी ऑफ फील्ड ऐंड टेलीविजन अवॉर्ड्स’ (BAFTA) 2019 पुरस्कार दिया गया। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार दिया गया। इस फिल्म को ‘एकल वृत्तचित्र’ वर्ग में पुरस्कार दिया गया।

RKFC में रियल कश्मीर एफसी टीम के कोच के रूप में रेंजर्स टीम के पूर्व स्टार डेविड रोबर्टसन की यात्रा को दर्शाया गया है। रोबर्टसन के मार्गदर्शन में रियल कश्मीर एफसी की टीम भारत की तत्कालीन शीर्ष दर्जे की फुटबॉल लीग आईलीग में अपने पहले ही सत्र में तीसरे स्थान पर रही थी।

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए मिशन इनोवेशन की शुरुआत की

भारत ने बढ़ती ऊर्जा जरुरतो, जलवायु परिवर्तन और दुनियाभर में बढ़ते प्रदुषण के खतरे को देखते हुए स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए मिशन इनोवेशन (Mission Innovation) की शुरुआत की है। इस मिशन में भारत के साथ चौबीस देश भी जुड़े हुए है।

मिशन इनोवेशन के लिए आठ क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन आठ क्षेत्रो में क्या-क्या प्रगति हुई है इसको लेकर नई दिल्ली में 4 से 6 नवम्बर को एक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में चौबीस देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे है।

शहरी क्षेत्रों में भूकम्‍प संबंधी शोध और बचाव पर SCO का संयुक्‍त अभ्‍यास

हरी क्षेत्रों में भूकम्‍प संबंधी शोध और बचाव पर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) देशों का संयुक्‍त अभ्‍यास (Shanghai Cooperation Organization Joint Exercise on Urban Earthquake) 4 से 7 नवम्बर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस संयुक्‍त अभ्‍यास का उद्घाटन किया। इस अभ्‍यास की मेजबानी राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल कर रहा है।

इस अभ्यास सत्र में चीन, भारत, रूस सहित सभी सदस्य देश ने भाग लिया। इसके साथ ही ब्राजील, मंगोलिया और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों को पर्यवेक्षकों के रूप में आमंत्रित किया गया था।

इसका उद्देश्‍य आपदा से निपटने की कार्रवाई संबंधी जानकारी और अनुभव तथा परस्‍पर सहयोग के लिए प्रौद्योगिकी उपयोग का अभ्‍यास करना है। इससे विभिन्‍न एजेंसियों के बीच परस्‍पर सहयोग बढ़ाने का भी अवसर मिलेगा।

रग्बी विश्व कप 2019: दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड को हराकर तीसरी बार विजेता बना

क्षिण अफ्रीका की टीम ने रग्बी विश्व कप (Rugby World Cup) 2019 का खिताब जीत लिया है। जापान के योकोहोमा में 2 नवम्बर को खेले गये इस विश्व कप के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड को हराकर तीसरी बार खिताब विजेता बना।

विश्व कप जीतने के मामले में दक्षिण अफ्रीका ने अब न्यूजीलैंड की बराबरी कर ली है। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका की टीम नस्लभेद के कारण पहले दो विश्व कप में नहीं खेली थी। दक्षिण अफ्रीका ने अपना पहला ख़िताब 1995 में और दूसरा 2007 में जीता था।

Ask your question

You must be logged in to post a comment.

Your questions:

  1. Reshma devires

    on Saturday 9th of November 2019 10:24:35 AM

    sir ias ke liy itna current suficent rhega ya humey or bhi padhna hoga please sir btay

  2. Rahul Kumar Yadav

    on Wednesday 6th of November 2019 04:12:39 PM

    Sar paryavaran videsh mamle aur aatankwad par bhi question banaye

View All News