पठार

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  • उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के मैक्सिको राज्य के अन्तर्गत चियापास का पठार स्थित है | उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के पश्चिमी तट पर कोलम्बिया का पठार, ग्रेट बेसिनऔर कोलोरैडो पठारसंयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है | उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के पूर्वी तट पर पिडमांट का पठार तथा ओजार्क का पठार स्थित है |
  • कोलोरैडो के पठार से कोलोरैडो नदी निकलती है और दक्षिण पश्चिम की दिशा में प्रवाहित होते हुए कैलीफोर्निया की खाड़ी में अपना जल गिराती है |
  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के अन्तर्गत दो पठार ब्राजील में स्थित हैं –
(i)     माडोग्रासो का पठार (ii)    ब्राजील का पठार   Note – कोलम्बिया का पठार कोलम्बिया में नहीं है बल्कि कोलम्बियाका पठार का विस्तारसंयुक्त राज्य अमेरिका में है |कोलम्बिया नामक देश दक्षिण अमेरिका महाद्वीप पर स्थित है |
  • माडोग्रासो पठार के दक्षिण में बोलीवियाका पठार स्थित है|बोलीविया का पठार,दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के बोलीविया में स्थित है |
  • बोलीविया के पठार पर टिटिकाका झील स्थित है|टिटिकाका झील विश्व की सबसे ऊँचाई पर स्थित नौकागम्य झील है| टिटिकाका झील पेरू और बोलीविया की सीमा पर स्थित है |
  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के दक्षिणी राज्य अर्जेन्टीना में पैटागोनिया का पठार स्थित है |
  • अफ्रीका महाद्वीप में मुख्य रूप से तीन पठार स्थित हैं –
(i)     अबीसीनिया का पठार (ii)    कटंगा का पठार (iii)   मालागासी का पठार  
  • अफ्रीका के उत्तर-पूर्वी सिरे को हॉर्न ऑफ अफ्रीका कहते हैं | हॉर्न ऑफ अफ्रीका के अन्तर्गतचार देश इरीट्रिया,सोमालिया, इथोपिया और जिबूती शामिलहैं|हॉर्न ऑफ अफ्रीका में स्थित पठार को अबीसीनिया का पठार कहते हैं |
  • रिपब्लिक ऑफ कांगो (जायरे) से कांगो नदी निकलती है और अटलांटिक महासागर में अपना जल गिराती है| कांगों नदी के साथ-साथ जो देश स्थित है उसे हम डोमिनिक रिपब्लिक ऑफ कांगो कहते हैं | कांगो गणराज्य को मध्य अफ्रीका गणराज्य भी कहा जाता है |
  • कांगो गणराज्य में ही कटंगा का पठार स्थित है | कटंगा के पठार में विश्व का सबसे बड़ा हीरे का भण्डार संचित है | इसके साथ-साथ यहां विश्व का सबसे बड़ा तांबे का भण्डार भी संचित है | इस प्रकार कहा जा सकता है कि कटंगा का पठार दो धातुओं, हीराऔर तांबा के दृष्टि से सम्पन्न है |
  • अफ्रीका के पूर्व में हिन्द महासागर में मेडागास्कर द्वीप स्थित है | मेडागास्कर द्वीप हिन्द महासागर का सबसे बड़ा द्वीप है | मेडागास्कर द्वीप पर स्थित पठार को मालागासी का पठारकहा जाता है |
  • अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर में भूमध्य सागर स्थित है |यूराल पर्वत के पश्चिम में तथा भूमध्य सागर के उत्तर में यूरोप महाद्वीप स्थित है |यूरोप महाद्वीप के पूर्वी शिरे को आइबेरिया का प्रायद्वीप कहा जाता है |
  • आइबेरिया का प्रायद्वीप तीन तरफ से जल से घिरा हुआ है |आइबेरिया प्रायद्वीप के दक्षिण में भूमध्य सागर, पूर्व में अटलांटिक महासागर तथा उत्तर में बिस्के की खाड़ी स्थित है|आइबेरिया के प्रायद्वीप पर दो देश स्पेन और पुर्तगाल स्थित हैं|आइबेरिया के प्रायद्वीप पर स्थित पठार को मैसेटा का पठार कहते हैं |
  • यूरोप महाद्वीप पर मैसेटा का पठार,स्पेन में स्थित है |
  • तुर्की एशिया महाद्वीप का सबसे पश्चिमी देश है |आनातोलिया का पठार,तुर्की में ही स्थित है | तुर्की के पूर्व में इराक तथा इराक के पूर्व में ईरान स्थित है| ईरान में स्थित पठार को ईरान का पठार कहते है |
  • ईरान का पठार दो तरफ से पर्वतों से घिरा हुआ है | ईरान के पठार के उत्तर में एल्बुर्ज पर्वत तथा ईरान के पठार के दक्षिण में जैग्रोस पर्वत स्थित है |
  • मध्य एशिया के देश ताजिकिस्तान में पामीर का पठार स्थित है | पामीर के पठार से अलग-अलग दिशाओं में कई पर्वत निकले हुए हैं जैसे – पश्चिम की ओर हिन्दुकुश पर्वत (अफगानिस्तान) दक्षिण-पूर्व की ओर काराकोरम पर्वत (जम्मू-कश्मीर) पूर्व में क्यूनलून पर्वत (चीन) और त्येननसांग पर्वत (चीन) |
  • तिब्बत का पठार हिमालयपर्वत और क्यूनलून पर्वत से घिरा हुआ है | तिब्बत का पठार विश्व का सबसे ऊँचा पठार है | तिब्बत का पठार विश्व का सबसे बड़ा पठार भी है | समुद्रतल से तिब्बत के पठार की ऊँचाई लगभग 5000 मीटर है |
  • पर्वतों के समान पठार भी धरातल का वह हिस्सा होता है जो सामान्य भूमि से ऊँचा उठा हुआ रहता है| पठारों की विशेषता होती है कि पठारों पर पर्वतों के समान शिखर नहीं पाये जाते हैं|पठार समतल होते हैं |
  • तिब्बत के पठार से अनेक महत्वपूर्ण नदियाँ निकलती हैं जैसे – ह्वागहों नदी, यांग्सी नदी, सिंधु नदी, ब्रह्मपुत्र नदी आदि|
  • ह्वागहों नदी तिब्बत के पठार से निकलकर बोहाई की खाड़ी में अपना जल गिराती है |यांग्सी नदी तिब्बत के पठार से निकलकर चीन के पूर्व में स्थित पीला सागर में अपना जल गिराती है |
  • हिमालय के उत्तर में तिब्बत के पठार के पश्चिमी क्षेत्र में एक झील स्थित है,इसे मानसरोवर झील कहते हैं|वास्तव में यह एक ग्लेशियर है|इसे चेमायुंगडुंग ग्लेशियर कहते हैं|
  • ब्रह्मपुत्र नदी चेमायुंगडुंग ग्लेशियर से निकलकर हिमालय के साथ-साथ पूर्व की दिशा में प्रवाहित होती है| इसके पश्चात् यह नामचाबारवा चोटी के समीप दक्षिण की ओर मुड़कर भारत में प्रवेश कर जाती है |
  • तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी को सांग्पों नदी के नाम से जाना जाता है| सांग्पों नदी नामचाबारवा चोटी के समीप दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुए भारत के अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश कर जाती है | अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी को दिहंग कहते हैं |
  • अरुणाचल प्रदेश के बाद ब्रह्मपुत्र नदी असम राज्य में प्रवाहित होते हुए बांग्लादेश में पहुँच जाती है| बांग्लादेश में इसे जमुना के नाम से जाना जाता है |
  • मानसरोवर झील से दो धाराएं पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं | इनमें से पहली धारा को सिंधु नदी तथा दूसरी धारा को सतलज नदी कहते हैं | सिंधु नदी पश्चिम की दिशा में प्रवाहित होते हुए अरब सागर में अपना जल गिराती है | तथा सतलज नदी पश्चिम की दिशा में प्रवाहित होते हुए सिंधु नदी से मिल जाती है|
  • सिन्धु तथा सतलज दोनों नदियां तीन देशों,चीन, भारत और पाकिस्तान से होकर प्रवाहित होती हैं|ब्रह्मपुत्र नदीभी तीन देशों चीन, भारत और बांग्लादेश से होकर प्रवाहित होती है|
  • भारत में दो पठार उल्लेखनीय हैं –
(i)     छोटानागपुर का पठार (ii)    दक्कन का पठार  
  • झारखण्ड और आसपास के राज्यों में फैले पठार को छोटानागपुर का पठार कहा जाता है| छोटानागपुर का पठार गुम्बद की तरह उठा हुआ है इसलिए इसे हम गुम्बद का पठार भी कहते हैं | भारत में लगभग 90% कोयला छोटानागपुर पठार से ही प्राप्त किया जाता है |
  • छोटानागपुर पठार का विस्तार झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा राज्य तक है |
  • महाराष्ट्र राज्य में दक्कन का लावा पठार स्थित है | भारत जब अफ्रीका महाद्वीप से टूटकर पूर्व की ओर प्रवाहित हो रहा था तो बीच में दरार उत्पन्न हो गया | इन दरारों से लावा निकलकर सतह पर फैल गया | इसी लावा के ठण्डा होने के पश्चात् दक्कन पठार का निर्माण हुआ|
  • दक्कन के लावा पठार के अपक्षय से लावा मिट्टी का निर्माण हुआ है | लावा मिट्टी को रेगुर मिट्टी भी कहा जाता है | यह मिट्टी कपास की खेतीके लिए सर्वाधिक उपर्युक्त होती है |
  • चीन के पूर्व में यूनान का पठार स्थित है|
  • ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप का पूरा पश्चिमी भाग लगभग पठारी है लेकिन यहाँ दो प्रमुख ऊँचे पठार दिखाई देते हैं-
(i)     अर्नाहमलैंड का पठार (ii)    किम्बरले का पठार   Note – किम्बरले दक्षिण अफ्रीका का एक महत्वपूर्ण शहर है| यहाँ से हीरा का उत्खनन किया जाता है, इसे किम्बरले की खान कहते हैं |किम्बरले विश्व के हीरा उत्पादक देशो में महत्वपूर्ण स्थान रखता है|
  • ऑस्ट्रेलिया में बाक्साइट उत्पादन के दो क्षेत्र हैं –
  • केपयार्क प्रायद्वीप
  • अर्नाहमलैंड का पठार
  • केपयार्क प्रायद्वीप पर स्थित वाइपा की खान से बाक्साइट निकाला जाता है|बाक्साइट उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया का विश्व में दूसरा स्थान है |
 

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SITESH KUMAR August 20, 2020, 11:29 am

Thanks sir ji