पर्वत

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  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के पश्चिमी तट पर उत्तर से लेकर दक्षिण तक विश्व की सबसे लम्बी पर्वत श्रेणी स्थित है, इस पर्वत श्रेणी को एण्डीज पर्वत श्रेणी कहते हैं | एण्डीज पर्वतश्रेणी की सबसे ऊँची पर्वत चोटी माउन्ट एकांकागुआ है | माउन्ट एकांकागुआ,चिली में स्थित है | एकांकागुआ की ऊँचाई6960 मीटर है |
  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीपके पश्चिमी तट पर पेरू की ठण्डी जलधारा प्रवाहित होती है | इस जलधारा की खोज अलेक्जेंडर हम्बोल्ट ने की थी |
  • उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की सर्वोच्च चोटी,माउन्ट मैकिन्ले है | माउन्ट मैकिन्ले,अलास्का पर्वत श्रेणी पर स्थित है|माउन्ट मैकिन्ले की ऊँचाई 6194 मीटर है |
  • उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के रॉकी पर्वत श्रेणी पर स्थित सर्वोच्च चोटी, माउन्ट एलबर्ट है | इसकी ऊँचाई 4401 मीटर है |
  • अमेरिका के पूर्वी तट पर अप्लेशियन पर्वत श्रेणी स्थित है |अमेरिका में एन्थ्रेसाइट किस्म के कोयले का भण्डारअप्लेशियन पर्वत श्रेणी के क्षेत्र में ही पाया जाता है | अमेरिका का अधिकांशत: कोयला यहीं से निकाला जाता है |
  • अप्लेशियन पर्वत की सर्वोच्च चोटी का नाम माउन्ट मिशेल (Mt. Mitchell) है | अप्लेशियन पर्वत श्रेणी पर न केवल कोयले का भण्डार स्थित है बल्कि यहाँ से पेट्रोलियम पदार्थ भी बहुतायत मात्रा में पाया जाता है |
  • रॉकी पर्वत श्रेणी के पश्चिम में दो पर्वत श्रेणियों का विस्तार है |रॉकी पर्वत श्रेणी के पश्चिम में कैलीफोर्निया राज्य में सियेरानेवादा पर्वत स्थित है | सियेरानेवादा पर्वत के उत्तर में कास्केड पर्वत श्रेणी का विस्तार है | कास्केड पर्वत श्रेणी के सबसे ऊँचे शिखर का नाम माउन्ट रेनियर है | माउन्ट रेनियर का विस्तार संयुक्त राज्य अमेरिका में है |
  • अफ्रीका महाद्वीप का सबसे महत्वपूर्ण पर्वत एटलस पर्वत है | एटलस पर्वत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी माउन्ट टुबकल (4165 मीटर) है |
  • एटलस पर्वत का विस्तार अफ्रीका महाद्वीप के तीन देशों मोरक्को, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया में है| माउन्ट टुबकल मोरक्को में स्थित है |
  • अफ्रीका महाद्वीप के दक्षिण में एक महत्वपूर्ण देश स्थित है, इसे दक्षिण अफ्रीका कहा जाता है | दक्षिण अफ्रीका में ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत श्रेणी स्थित है |
  • अफ्रीका महाद्वीप के मध्य में कांगो गणराज्य (जायरे) में मिटुम्बा पर्वत श्रेणी स्थित है |
  • अफ्रीका की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउन्ट किलीमंजारो(5895 मीटर) है | माउन्ट किलीमंजारो तंजानिया में स्थित है |
  • यूरोप महाद्वीप में स्पेन और फ्रांस की सीमा पर पीरेनीज पर्वत स्थित है |
  • यूरोप महाद्वीप में इटली देश की भौगोलिक स्थिति बिल्कुल भारत के समान है | जिस प्रकार भारत के तीन तरफ समुद्र तथा उत्तर में विशाल पर्वत स्थित है, ठीक उसी प्रकार इटली भी तीन तरफ से सागर से घिरा हुआ है | इसके अतिरिक्त इटली के उत्तर में आल्प्स पर्वत स्थित है |
  • आल्प्स पर्वत की सबसे ऊँची चोटी का नाम माउन्ट ब्लैंक है | यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउन्ट एल्ब्रूस है | माउन्ट एल्ब्रूस काकेशस पर्वत श्रेणी पर स्थित है |
  • वास्जेस पर्वत, ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत और हार्ज पर्वत, जर्मनी में स्थित हैं |
  • भूमध्य सागर के उत्तर में एशिया महाद्वीप का सबसे पश्चिमी देश स्थित है, इसे तुर्की कहते हैं | तुर्की में टारस पर्वत का विस्तार है|
  • एशिया महाद्वीप में ईरान में दो पर्वत श्रेणियां स्थित हैं –
(i)     एल्बुर्ज पर्वत (ii)    जैग्रोस पर्वत  
  • एल्बुर्ज पर्वत श्रेणी की सर्वोच्च चोटीदेमाबन्द है |
  • भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत स्थित है | हिमालय पर्वतविश्व की तीसरी सबसे लम्बी पर्वत श्रृंखला है | हिमालय का विस्तार तीन देशों भारत, नेपाल तथा चीन में है | हिमालय की सर्वोच्च चोटी माउन्ट एवरेस्ट है |
  • विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी माउन्ट एवरेस्ट है| माउन्ट एवरेस्ट की ऊँचाई 8848 मीटर है | माउन्ट एवरेस्ट नेपाल में स्थित है |
  • भारत में हिमालय की सबसे ऊँची पर्वत चोटी K2(गाडविन आस्टीन) है|K2(गाडविन आस्टीन)पर्वत चोटी जम्मू-कश्मीर राज्य में काराकोरम पर्वत श्रेणी पर स्थित है|K2(गाडविन आस्टीन)पर्वत चोटी की ऊँचाई 8611 मीटर है |
  • हिमालय पर्वत श्रृंखला के उत्तर में पामीर का पठार स्थित है |पामीर का पठार कई पर्वतों का मिलन बिंदु है|इसलिए इसे पामीर की गाँठअथवा ग्रन्थि भी कहते हैं |
  • पामीर पठार के पश्चिम में हिन्दुकुश पर्वत श्रेणी निकली हुई है | हिन्दुकुश पर्वत श्रेणी अफगानिस्तान में स्थित है |
  • पामीर पठार के दक्षिण-पूर्व की ओर एक पर्वत निकला हुआ है, इसे काराकोरम पर्वत श्रेणी कहते हैं|काराकोरम पर्वत श्रेणी जम्मू-कश्मीर राज्य में स्थिर है| पामीर पठार से पूर्व की ओर एक अन्य पर्वत निकला हुआ है, इसे क्यूनलुन पर्वत श्रेणी कहते हैं|क्यूनलुन पर्वत श्रेणी तिब्बत में स्थित है |
  • पामीर पठार से उत्तर-पूर्व की ओर एक पर्वत निकला हुआ है, इसे त्येनसांग पर्वत कहते है | त्येनसांग पर्वत चीन में स्थित है |
  • हिमालय के दक्षिण में अरावली पर्वत श्रेणी का विस्तार है | अरावली पर्वत श्रेणी का विस्तार गुजरात के पालनपुर से लेकर दिल्ली तक लगभग 700 किलोमीटर तक है | अरावली पर्वत श्रेणी भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रेणी है |
  • भारत के पश्चिमी तट के साथ-साथ विस्तृत पर्वत को पश्चिमी घाट पर्वत तथा पूर्वी तट के साथ-साथ विस्तृत पर्वत को पूर्वी घाट पर्वत कहते हैं |
  • भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा भारत के पश्चिम में अरब सागर स्थित है|बंगाल की खाड़ी और अरब सागर हिन्द महासागर के ही दो छोटे-छोटे शिरे हैं |
  • भारत में पश्चिमी घाट पर्वत की सबसे ऊँची चोटी अनाइमुदी है | अनाइमुदी पर्वतचोटीदक्षिण भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है |
  • अरावली पर्वत श्रेणी तथा पश्चिमी घाट पर्वत के मध्य में स्थित पूर्व से पश्चिम की ओर सतपुड़ा पर्वत श्रेणी का विस्तार है | सतपुड़ा पर्वत का अधिकाँश भाग मध्य प्रदेश में स्थित है |
  • भारत के पूर्व में म्यांमार स्थित है | म्यांमार में उत्तर से दक्षिण की ओर एक पर्वत का विस्तार है, इसे आराकानयोमा पर्वत कहते हैं| आरकानयोमा पर्वत वास्तव में हिमालय का ही दक्षिण में विस्तारित भाग है |
  • म्यांमार से आगे दक्षिण की ओर आराकानयोमा पर्वत का विस्तार बंगाल की खाड़ी में भी है किन्तु बंगाल की खाड़ी में यह डूब जाता है और फिर आराकानयोमा पर्वत बंगाल की खाड़ी में यत्र-तत्र द्वीपों के सामान दिखाई देता है |अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आराकानयोमा पर्वत का ही समुद्र में विस्तार है |
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उत्तर में म्यांमार का एक द्वीप स्थित है | यह द्वीप आराकानयोमा पर्वत का ही शिखर है | इसे कोको द्वीप कहते हैं |
  • रूस में उत्तर से दक्षिण की दिशा में यूराल पर्वत स्थित है| यूराल पर्वत की सबसे ऊंची पर्वत चोटी गोरानैरोडनाया है | यूराल पर्वत एशिया और यूरोप महाद्वीप को विभाजित करता है|यूरालपर्वतके पूर्व में एशिया महाद्वीप और यूरालपर्वत के पश्चिम में यूरोप महाद्वीप का विस्तार है |
  • रूस के पूर्वी भाग को साइबेरिया कहा जाता है | साइबेरिया में हमेशा बर्फ जमा रहता है | रूस की अधिकांश जनसंख्या यूराल पर्वत के पश्चिम में निवास करती है| रूस के साइबेरिया क्षेत्र में बर्खोयांस्क पर्वत स्थित है |
  • आस्ट्रेलिया महाद्वीप के पूर्वी तट के साथ-साथ ग्रेट डिवाइडिंग रेंज का विस्तार है | ग्रेट डिवाइडिंग रेंज के सर्वोच्च शिखर का नाम माउन्ट कास्यूस्को है |
  • विश्व के प्रमुख पर्वत तथा उनकी अवस्थिति निम्नलिखित है –
 
पर्वतदेश
ब्रुक्सअलास्का
मैकेन्जीकनाडा
कास्केडसंयुक्त राज्य अमेरिका
मिटुम्बाकांगो गणराज्य
ड्रेकेन्सबर्गदक्षिण अफ्रीका
ब्लैक फारेस्टजर्मनी
वास्जेसजर्मनी
हार्ज पर्वतजर्मनी
टारस पर्वततुर्की
एल्बुर्जईरान
जैग्रोसईरान
बर्खोयान्स्करूस
अराकानयोमाम्यांमार
 
  • महाद्वीपों पर स्थित विश्व के सर्वोच्च पर्वत चोटियों का विवरण निम्नलिखित है –
महाद्वीपसर्वोच्च चोटी
एशियाएवरेस्ट
यूरोपमाउन्ट एल्ब्रुश
उत्तरी अमेरिकामाउन्ट मैकिन्ले
दक्षिणी अमेरिकामाउन्ट एकांकागुआ
अफ्रीकामाउन्ट किलिमंजारे
ऑस्ट्रेलियामाउन्ट कास्यूस्को
अंटार्कटिकावेन्सन मैसिफ
  • जिन पर्वतों की ऊँचाई समुद्र तल से 1000 मीटर से अधिक होती है, उन्हें पर्वत (Mountain) कहा जाता है| जबकि जिन पर्वतों की ऊँचाई समुद्र तल से 1000 मीटर से कम होती हैं, उन्हें पहाड़ी (Hill) कहा जाता है |
  • पर्वत धरातल पर स्थित वह संरचना होती है जिसका आधार चौड़ा किन्तु ऊपर का भाग नुकीला होता है | पर्वत के ऊपरी भाग को शिखर कहा जाता है | एक ही पर्वत पर कई शिखर मिलते है |उदाहरण के लिए-हिमालय पर्वतके शिखर अथवा चोटियाँ |
  • हिमालय एक विशाल पर्वत है | हिमालय पर दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत चोटी स्थित है | हिमालय पर कई पर्वत चोटियां है| जैसे – एवरेस्ट, कंचनजंघा, मकालू, धौलागिरि, अन्नपूर्णा आदि |
  • पर्वत मुख्यत: चार प्रकार के होते हैं –
(i)     वलित पर्वत अथवा मोड़दार पर्वत (ii)    ब्लॉक पर्वत (iii)   ज्वालामुखी पर्वत (iv)   अवशिष्ट पर्वत .  
  • पृथ्वी के भीतर कई बल प्रभावी रूप से कार्य करते हैं जिसके कारण पृथ्वी के सतह की प्लेटें गति करती हैं | जब किसी विस्तृत भाग पर दो दिशाओं से दबाव पड़ता है तो बीच के भूभाग में मोड़ उत्पन्न हो जाता है| इस क्रिया को वलन कहते हैं| जब बल दोनों ओर से प्रभावी होता है तब उसे संपीडनात्मक बल कहते हैं |
  • पृथ्वी के आतंरिक बल के कारण किसी विस्तृत भूभाग मेंसंपीडनात्मक बल द्वारा जब वलन हो जाता है तो इस प्रक्रिया के द्वारा ही वलित पर्वत का निर्माण होता है | विश्व के सभी विशाल, ऊँचे और विस्तृत पर्वत वलित पर्वतों के ही उदाहरण है| जैसे – एण्डीजपर्वत, रॉकीपर्वत, यूरालपर्वत, हिमालय पर्वतआदि |
  • ब्लॉक पर्वत का निर्माण खिंचाव के कारण होता है| पृथ्वी के भीतर स्थित जब दो छोटी प्लेटें दो विपरीत दिशा में खिसक जाती हैं तो बीच के बचे भाग में भ्रंशन की क्रिया उत्पन्न हो जाती है | इस क्रिया के परिणामस्वरूप भ्रंश घाटी (Rift Vally) का निर्माण होता है |
  • वास्तव में ब्लॉक पर्वत वास्तविक पर्वत नहीं होता है बल्कि भ्रंश घाटी के निर्माण के परिणामस्वरूप ही ब्लॉक पर्वत का निर्माण होता है | चूँकि ब्लॉक पर्वत का निर्माण भ्रंश के कारण होता है|अत: इसे भ्रशोत्थ पर्वत कहते हैं |इसका अर्थ यह है कि पृथ्वी पर जहाँ कहीं भ्रंश घाटी (Rift Vally)का निर्माण होता है उसी के साथ-साथ भ्रंशोत्थ पर्वतों का भी निर्माण हो जाता है |
  • ब्लॉक पर्वत का सबसे अच्छा उदाहरण जर्मनी में दिखाई देता है | जर्मनी में एक ओर वास्जेस पर्वत तथा दूसरी ओर ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत स्थित है| इन दोनों पर्वतों के मध्य भाग में एक घाटी का निर्माण हो गया है |इस घाटी में जर्मनी की महत्वपूर्ण नदी, राइन नदी प्रवाहित होती है |
  • भ्रंशोत्थ पर्वत का दूसरा उदाहरण भारत में सतपुड़ा पहाड़ीके रूप में दिखाई देता है | सतपुड़ा पहाड़ी भारत के मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य में विस्त्तृत है |
  • सतपुड़ा पहाड़ी के उत्तर एवं दक्षिण दोनों तरफ भ्रंश घाटी का निर्माण हुआ है|सतपुड़ा पहाड़ी के उत्तर में स्थित भ्रंश घाटी में नर्मदा नदी तथा इसके दक्षिण के भ्रंश घाटी में तापी नदी प्रवाहित होती है |
  • तापी नदी खम्भात की खाड़ी में अपना जल गिराती है | तापी नदी के मुहाने पर महत्वपूर्ण शहर सूरत स्थित है | जबकि नर्मदा नदी के मुहाने पर भड़ौच नामक शहर स्थित है |
  • दक्षिण भारत की अधिकाँश नदियाँ पूरब की दिशा में प्रवाहित होती हैं जबकि केवल दो प्रमुख नदियां नर्मदाऔर तापी पश्चिम की दिशा में प्रवाहित होते हुए अरब सागर में अपना जल गिराती हैं |
  • सियेरानेवादा, कैलीफोर्निया राज्य में स्थित है| यह विश्व का सबसे विशाल ब्लॉक पर्वत का उदाहरण है |
  • ज्वालामुखी विस्फोट के कारण पृथ्वी के भीतर विद्यमान पदार्थ मैग्मा के रूप में बाहर निकलता है | मैग्मा जब पृथ्वी की सतह पर ठण्डा होकर जम जाता है तब इससे ज्वालामुखी चट्टानोंका निर्माण होता है |
  • ज्वालामुखी विस्फोट से विखंडित पदार्थ, राख, गैस, जलवाष्प आदि निकलता है|विश्व में सर्वाधिक ज्वालामुखी एण्डीज पर्वत पर पाये जाते हैं | एण्डीज पर्वत पर लगभग 22 ज्वालामुखी पर्वत विद्यमान है | जिनमें सबसे ऊँचा और सक्रिय ज्वालामुखी,कोटोपैक्सी (इक्वेडोर) है |
  • अवशिष्ट पर्वत किसी विशाल पर्वत के बचे हुए भाग होते हैं  | अवशिष्ट पर्वत लाखों वर्षो पहले एण्डीज और हिमालय पर्वतों की भांति ही विशाल पर्वत रहे होंगे किन्तु वर्तमान में इन पर्वतों का अनेक भौतिक कारकों के कारण अपक्षय होता रहता है जिससे ये दिन-प्रतिदिन समाप्त होते जाते हैं|
  • भारत में अरावली पर्वत, पश्चिमी घाट पर्वत और पूर्वी घाट पर्वत अवशिष्ट पर्वतों के उदाहरण के तौर पर देखे जा सकते हैं | अरावली पर्वत कभी हिमालय से भी विशाल पर्वत रहा होगा किन्तु आज यह अवशेष के तौर पर ही दिखाई देता है |

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SITESH KUMAR August 17, 2020, 6:19 pm

Very nice class sir 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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Rk dukiya June 29, 2020, 11:31 pm

After reading and writing these notes I slowed all the questions of almost Ias level. I have no words for the great geography teacher.