भारत में जल संसाधन

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  • विश्व में चौथा सबसे बड़ा जल ग्रहण क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी का है, लेकिन भारत में सबसे बड़ा जल ग्रहण क्षेत्र गंगा नदी का है, क्योंकि ब्रह्मपुत्र नदी भारत में केवल पूर्वोत्तर भारत में प्रवाहित होती है और इसकी अधिकाँश लम्बाई चीन में है |
  • दक्षिण भारत की नदियों में सबसे बड़ा जल ग्रहण क्षेत्र गोदावरी नदी का है |
  • वार्षिक वाही जल (एक वर्ष में जल प्रवाह की मात्रा) की दृष्टि से ‘ब्रह्मपुत्र नदी का जल’ प्रथम स्थान पर है, लेकिन ब्रह्मपुत्र नदी के अधिकाँश जल का उपयोग भारत नहीं कर पाता है |
  • वार्षिक वाही जल की दृष्टि से ब्रह्मपुत्र नदी के बाद गंगा नदी का दूसरा स्थान है |
  • भारत में 78% जल का उपयोग कृषि कार्य में,13% जल का उपयोगजल विद्युत निर्माण में, 6% जल का उपयोग घरेलू कार्यों में तथा 3% जल का उपयोगउद्योगोंमें किया जाता है |
  • मैदानी भाग की नदियों के जल का उपयोग सिंचाई के कार्य में अधिक किया जाता है |
  • मुलायम मिट्टी का क्षेत्र होने के कारण मैदानी भागों में नदियों से नहरें निकाली जा सकती हैं, यही कारण है कि नहरों से सिंचाई की दृष्टि से उत्तर प्रदेश भारत का प्रथम राज्य है |
  • हिमालय क्षेत्र और पठारी नदी भारत की नदियां जल विद्युत उत्पादन के लिए अधिक उपयोगी होती हैं, क्योंकि पठारी भारत की भूमि विषम या उबड़-खाबड़ होने के कारण प्राकृतिक रूप से जल प्रपातों का निर्माण हुआ है, जिसके कारण यहां जल विद्युत उत्पादन आसान है।
  • हिमालय की अपेक्षा पठारी भारत में जल विद्युत का विकास अधिक हुआ है |
 

भूमिगत जल

  • भारत में भूमिगत जल का सर्वाधिक भंडार सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र के मैदान अर्थात् उत्तर भारत के मैदान में पाया जाता है क्योंकि यहां की मिट्टी मुलायम होने के कारण वर्षा जल एवं नदी जल के लिए सोख्ता का कार्य करती है।इसलिए उत्तर भारत के मैदान की नदियों में जल की मात्रा कम नहीं होती है क्योंकि सूखे के मौसम में भूमिगत जल से नदी के जल की आपूर्ति होती रहती है।
भूमिगत जल
भूमिगत जल
  • उत्तर भारत के मैदान के अलावा पूर्वी तटीय मैदान और पश्चिमी तटीय मैदान पर मिट्टी के नरम और मुलायम होने के कारण भूमिगत जल पाया जाता है |
  • पठारी भारत में या तो भूमिगत जल नहीं पाया जाता या तो बहुत कम मात्रा में पाया जाता है, क्योंकि यहाँ की भूमि पथरीली है | प्रायद्वीपीय भारत के मैदान में जल पत्थरों के दरारों में प्रवेश कर जाता है, जिसके कारण कुछ मात्रा में पठारी भागों में भी भूमिगत जल पाया जाता है |
  • उत्तर भारत के मैदान में भूमिगत जल का भण्डारण पाया जाता है,किन्तु पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में सिंचाई की आवश्यकताओं के कारण नलकूप आदि के माध्यम से भूमिगत जल का अधिक दोहन किया गया है |
  • भूमिगत जल के अधिक दोहन के कारण भूमिगत जल की मात्रा में तो कमी आयी है, साथ ही अत्यधिक सिंचाई के कारण यहाँ की मिट्टियों में लवणीयता एवं अम्लीयता की मात्रा में भी वृद्धि हुई है |
  • पंजाबऔरहरियाणा जैसे हरित क्रांति वाले राज्यों में सिंचाई की आवश्यकता के कारण ट्यूबवेल और पंप सेट लगाकर भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हुआ है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में भूमिगत जल का स्तर अत्यधिक नीचे चला गया है |
  • पठारी भारत में भूमिगत जल बहुत कम पाया जाता है, क्योंकि यहां की भूमि पथरीली है जिसके कारण मिट्टी यहां पानी सोख नहीं पाते हैं। लेकिन पठारी भारत के चट्टानों में दरारें पाई जाती हैं | इन दरारों में वर्षा जल आसानी से प्रवेश कर जाता है जो भूमिगत जल के रूप में ही कार्य करता है। इसलिए दक्षिण भारत में कहीं-कहीं कुँआ पाया जाता है।
  • जलको भारतीय संविधान में राज्य सूचीके अन्तर्गत सम्मिलित किया गया है | इसलिए राज्य सरकारें अपने राज्य में बहने वाले जल के उपयोग और वितरण पर पूरा नियंत्रण रखती हैं |

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Ravi shankar Kumar March 2, 2020, 6:12 am

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