लौह अयस्क

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  • भूगर्भ में चट्टानों के नीचे दबा हुआ कोई भी धातु शुद्ध धातु के रूप में नहीं होता है, अपितु यह चट्टानों के साथ मिश्रित अवस्था में होता है | इसमें कुछ मात्रा में धातुएं, कुछ मात्रा में अन्य धातुएं, चट्टानी कण और नमी होती है | इस मिश्रित  अवस्था  की  धातु युक्त चट्टानों को जब एक निश्चित ताप पर गर्म करके पिघलाते हैं,तब उससे शुद्ध रूप में धातु प्राप्त होता है |
  • भारत का लौह अयस्क के उत्पादन में विश्व में चौथा स्थान है | लौह अयस्क उत्पादन में शीर्ष स्थान वाले देश क्रमश: चीन, आस्ट्रेलिया, ब्राजील तथा भारत है |
भारत  में मुख्यतः चार प्रकार के लौह अयस्क पाये जाते हैं – (i)     मैग्नेटाइट (ii)    हेमेटाइट (iii)   लिमोनाइट (iv)   सिडेराइट
  • लौह अयस्कों में मैग्नेटाइट अयस्क सर्वोत्कृष्ट कोटि का लौह अयस्क है|किन्तु भारत में यह बहुत कम मात्रा में पाया जाता है | मैग्नेटाइट भारत में मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत के राज्य जैसे – कर्नाटक,तमिलनाडु, केरल तथा गोवा में पाया जाता है |
  • मैग्नेटाइट मुख्य रूप से कर्नाटक में कुन्द्रेमुख पर्वत , केरल के कोझिकोड और तमिलनाडु के सलेम में पाया जाता है |
  • भारत में मैग्नेटाइट लोहे का लगभग 70 % भाग कर्नाटक राज्य में पाया जाता है |
  • हेमेटाइट भारत में लौह अयस्कों में द्वितीय कोटि का लौह अयस्क है | किन्तु भारत में 80% लौहअयस्क हेमेटाइट कोटि का ही पाया जाता है |
  • जहाँ मैग्नेटाइट दक्षिण भारत के राज्यों में पाया जाता है,वहीं हेमेटाइट पूर्वी भारत के राज्यों में जैसे – ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों में पाया जाता है |
  • लिमोनाइट और सीडेराइट घटिया किस्म का लौह अयस्क होता है | इसका आर्थिक रूप से महत्व नहीं होता है | इसमें भी सिडेराइट अत्यन्त ही निम्न कोटि का लौह अयस्क होता है |
  • भारत में सर्वाधिक लौह अयस्क भण्डारण कर्नाटक राज्य में है किन्तु सर्वाधिक उत्पादन ओडिशा राज्य में होता है |
  • लौह अयस्क का सर्वाधिक भण्डारण वाले शीर्ष राज्य क्रमश: कर्नाटक, ओडिशा एवं झारखण्ड,छत्तीसगढ़ और आन्ध्र प्रदेश हैं |
  • लौह अयस्क का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले शीर्ष राज्य क्रमश: ओडिशा, छत्तीसगढ़,कर्नाटक एवं झारखण्ड हैं |
  • देश का सबसे बड़ा लौह अयस्क क्षेत्र बरामजादा समूह के नाम से जाना जाता है | बरामजादा समूह एक चट्टानी समूह है | लौह अयस्क क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला बरामजादा समूह देश के दो राज्यों झारखण्ड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में विस्तृत है |
  • बरामजादा समूह का विस्तार झारखण्ड के सिंहभूमि जिला में और ओडिशा के क्योझर जिले में है | बरामजादा समूह लौह अयस्क का सबसे समृद्ध क्षेत्र है तथा भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क क्षेत्र है |
  • भारत में लौह अयस्क की प्राप्ति धारवाड़ क्रम या कुडप्पा क्रम की आग्नेय चट्टानों में होती है |
Note– पिछले अध्यायों में चट्टानों का विस्तृत विवरण दिया जा चुका है |
  • लोहा मुख्य रूप से आग्नेय चट्टानों में पाया जाता है,जबकि ईंधन खनिज जैसे – कोयला,पेट्रोलियम आदि पदार्थ परतदार चट्टानों में पाया जाता है |
  • भारत में उत्पादित अधिकांश लोहे का निर्यात जापान को किया जाता है तथा दूसरे स्थान पर भारत लोहे का निर्यात चीन को करता है |
भारत के प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र निम्नलिखित हैं (i)     ओडिशा- ओडिशा में लौह अयस्क उत्पादन के तीन क्षेत्र हैं –           (a)    मयूर भंज जिले में गुरु महिसानी और बादाम पहाड़ी पर           (b)    क्योझर जिला (बारामजादा समूह के अंतर्गत आता है |)           (c)    सुंदरगढ़ जिला (ii)    झारखण्ड  –           झारखण्ड में लौह अयस्क उत्पादन के प्रमुख रूप से दो क्षेत्र हैं –           (a)    पंसिराबुरु           (b)    नोवामंडी
  • पंसिराबुरु और नोवामंडी ये दोनों क्षेत्र बरामजादा समूह के अंर्तगत ही आते हैं|
(iii)   छत्तीसगढ़–  छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्र हैं –           (a)    डल्लीराजहरा ( दुर्ग जिला में)           (b)    बैलाडीला (दंतेवाड़ा जिला में) (iv)   कर्नाटक – कर्नाटक में लौह अयस्क उत्पादन के तीन क्षेत्र हैं-           (a)    कुन्द्रेमुख(चिकमंगलूर जिला)           (b)    बाबाबूदन पहाड़ी ( चिकमंगलूर जिला )           (c)    संदूर पहाड़ी ( बेलारी जिला ) महत्वपूर्णतथ्य-
  • कुन्द्रेमुख (चिकमंगलूर जिला) में मैग्नेटाइट लोहा पाया जाता है |
  • तमिलनाडु के सलेम में मैग्नेटाइट लोहा पाया जाता है |
  • केरल के कोझीकोड में मैग्नेटाइट किस्म का लोहा पाया जाता है |
  • गोवा राज्य में भी मैग्नेटाइट किस्म का लोहा पाया जाता है|
  • महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में लौह अयस्क का संचित भण्डार है |

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Gaurav February 20, 2021, 7:24 am

Very nice

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राजमा खाने के 10 बेहतरीन लाभ Benefits Of Rajma In Hindi - Healthlekh.com February 14, 2021, 6:08 pm

[…] राजमा में लौह की मात्रा बहुत होती है इसलिये जिन्हें […]

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CM MANSOORI November 5, 2020, 8:01 am

Very nice. Content

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Ajeet kumar mishra May 30, 2020, 4:41 pm

Amazing sir

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babita yadav April 26, 2020, 1:08 am

sir pdf link nahi h diya kya

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Brijesh April 23, 2020, 8:03 am

Thank you sir