यंग बंगाल आन्दोलन

यंग बंगाल आन्दोलन
  • राजा राममोहन रायपाश्चात्य विचारधारासे प्रभावित थे|पाश्चात्य विचारधारा से प्रभावित होने के कारण ही ये अंग्रेजी माध्यम के द्वारा पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञानको भारत में लाना चाहते थे जिससे भारत में भी आधुनिकता लायी जा सके|
  • राजा राममोहन रायका मानना था कि भारत में भी पाश्चात्य शिक्षा के माध्यम से लोगों के सामाजिक जीवन में परिवर्तन लाया जा सकता है|राजा राममोहन राय के पाश्चात्यविचार भारतीय परम्पराओं को चुनौती दे रहे थे|राजा राममोहन राय के विचारों नेबंगाल को बहुत अधिक प्रभावित किया,विशेष रूप से बंगाल के युवाओं पर इसका जबरदस्त प्रभाव देखने को मिला|
  • बंगाल के पढ़े-लिखे युवा राजा राममोहन राय के विचारों से बहुत अधिक प्रभावित थे|1830 ई०सेलेकर 1840 ई० के मध्य तक बंगाल के युवाओं में रेडिकल विचारधारा का जन्म हुआ, इसे ही यंग बंगाल आन्दोलन कहा जाता है|
  • यंग बंगाल आन्दोलन का प्रमुख केंद्र बंगाल के विश्वविद्यालय थे, विशेष रूप से बंगाल के हिन्दू कॉलेज|कलकत्ता स्थित हिन्दू कॉलेज की स्थापना राजा राममोहन राय ने किया था|इस आन्दोलन का नेतृत्व हेनरी लुई विवियन डिरोजियोके हांथों में था|
  • हेनरी लुई विवियन डिरोजियो पाश्चात्य मूल के थे|इन्होंने कलकत्ता के हिन्दू कॉलेज में 1826 ई० से लेकर 1831 ई० तक अध्यापन का कार्य किया|इस 5 वर्ष के अध्यापन काल में ही डिरोजियो ने कलकत्ता को बहुत अधिक प्रभावित किया था| ये घूम-घूम कर आधुनिकता पर आधारित अतिवादी विचारों का प्रचार-प्रसार करते थे|
  • डिरोजियोफ्रांसीसी क्रांति से बहुत ज्यादा प्रभावित थे| इनके द्वारा पुराने और जर्जर रीति-रिवाजों का विरोध, धार्मिक अनुष्ठानों कीनिंदातथा नारी शिक्षा और नारी के अधिकारों की जोरदार वकालत की गई|
  • डिरोजियो के इन बातों का कट्टर लोगों के द्वारा घोर विरोध किया गया| इन विरोधों के परिणामस्वरूप 1831ई० में डिरोजियो को हिन्दू कॉलेज से निकाल दिया गया और इसी वर्ष कालरा (Cholera) बीमारी के कारण डिरोजियो की मृत्यु हो गई|डिरोजियो के मृत्यु के पश्चात् यंग बंगाल आन्दोलन काफी शिथिल पड़ गया|
  • डिरोजियो के द्वारा तीन संस्थाओं की स्थापना की गई थी, जो निम्नलिखित हैं –
  • सोसाइटी फॉर द एक्विजिशन ऑफ़ जनरल नॉलेज
  • डिबेटिंग क्लब
  • बंगहित सभा
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
  • बंगाल में 1840 और 1850 के दशक में ईश्वरचन्द्र विद्यासागर अत्यधिकसक्रिय रहे|इन्होंने स्त्री शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के लिए एक सशक्त आन्दोलन चलाया| ईश्वरचन्द्र विद्यासागर लगभग 35 बालिका विद्यालयों से जुड़े हुए थे|ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की मान्यता थी कि भारतीय बालिकाओं को अंग्रेजी माध्यम में पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान से शिक्षित किया जाये|ईश्वरचन्द्र विद्यासागर के प्रयासों से ही बालिकाओं के लिए कलकत्ता में बैथुल कॉलेज की स्थापना हुई|इस कॉलेज की स्थापना से बंगाल के अभिभावक इनसे नाराज हो गये|
  • विधवा पुनर्विवाह के लिए इनके द्वारा सशक्त आन्दोलन चलाया गया| इनके प्रयासों के परिणामस्वरुप ही लॉर्ड केनिंग की सरकार ने 1856 ई० में विधवा पुनर्विवाह एक्ट पारित किया|इस एक्ट के बनने के बाद भारत में विधवा पुनर्विवाह को मान्यता मिल गई|
  थियोसोफिकलसोसाइटी  
  • थियोसोफिकल आन्दोलन धर्म, दर्शन और गुह्य विद्या पर आधारित आन्दोलन था|इनका मानना था कि मनुष्य के अन्दर कुछ चमत्कारिक शक्तियाँ हैं,इन शक्तियों के कारण मनुष्य ध्यान, योग और चिंतन के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त कर सकता है|वास्तव में यही थियोसोफिकल आन्दोलन का आधार था| थियोसोफिकल आन्दोलनकी शुरुआत मैडम ब्लावत्सकी और कर्नल आल्काट ने किया था|मैडम ब्लावत्सकी रूस की थीं जबकि कर्नल आल्काट अमेरिका के रिटायर्ड फौजी थे| इन दोनों ने मिलकर 1875 ई० में न्यूयॉर्क में थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना की थी|
  • मैडम ब्लावत्सकीऔर कर्नल आल्काटइन दोनों लोगों परभारतीय संस्कृति का बहुत गहराप्रभावथा| अमेरिका में थियोसोफिकलसोसाइटी स्थापनाके कुछ समय बाद ही ये भारत भ्रमण पर आ गये थे|भारत आने के बाद ये भारतीय संस्कृति से इतना अधिक प्रभावित हुए कि1882 ई० में मद्रास में अड्यार नामक स्थान पर इन्होंने थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना किया|एनी बेसेंट1889 ई०में इस आन्दोलन की सदस्या बनीं|
  • 1893 ई० में शिकागो में प्रथम विश्व धर्मं सम्मलेन में भाग लेने एनी बेसेंट भी गई हुई थीं|1893 ई० में ही एनी बेसेंट भारत आ गई थीं|भारत आकर एनी बेसेंट ने थियोसोफिकल सोसाइटी का प्रचार-प्रसार किया|एनी बेसेंट भारतीय धर्मं दर्शन से अत्यधिक प्रभावित थीं और भारतीय धर्म और दर्शन में भारतीयों का विश्वास फिर से जगाना चाहती थीं|इन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कर्मकांड की जगह पर मानव सेवा को अपने धर्मं का आधार बनाना चाहिए| इन्होंने भारतीय उपनिषदों में दी गई शिक्षा पर विश्वास जताया और इन्होंने बताया किउपनिषद् ज्ञान के भण्डारहैं|
  • भारत में थियोसोफिकल सोसाइटी और एनी बेसेंट का सबसे बड़ा योगदान यहाँ के लोगों को शिक्षित करना था|भारतीय युवकों को शिक्षित करने के लिए एनी बेसेंट ने 1898 ई० में बनारस में सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना की थी|इन्होंने1898ई० में जिस हिन्दू कॉलेज की स्थापना की थी, इसी को 1916 ई० में पं० मदनमोहन मालवीय ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया|
 

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