विश्व के मरूस्थल

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विश्व के मरूस्थल
विश्व के मरूस्थल
  • भूमध्य रेखा को विषुवत रेखा अथवा 0 डिग्री अक्षांश रेखा कहा जाता है|पृथ्वी पर 900अक्षांश रेखाएं उत्तरी गोलार्द्ध में तथा 900अक्षांश रेखाएं दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित हैं | विषुवत रेखा पर वर्षभर सूर्य की किरणें लम्बवतपड़ती हैं|अत: सूर्यातप की सबसे ज्यादा मात्रा विषुवत रेखा पर ही प्राप्त होती है |सूर्यातप की अधिक मात्रा होने के कारण विषुवत रेखा पर हवाएं गर्म होकर ऊपर उठने लगती हैं जिससे संवहनीय धाराओं का निर्माण होता है |
  • विषुवत रेखा पर सूर्यातप के कारण सागरों की सतह से हवाएं गर्म होकर जलवाष्प के रूप में ऊपर उठती हैं | वायुमंडल में जलवाष्प के रूप में उठी हुई सागरीय हवाएं ठण्डी होकर जल बूंदों में परिवर्तित हो जाती हैं जिससे वर्षा होती है | यही कारण है कि विषुवत रेखा पर वर्षभर वर्षा होती है |
  • विषुवत रेखा पर वर्षभर वर्षा होती है इसलिए यहाँ मरूस्थल नहीं पाये जाते हैं|विषुवत रेखा पर वर्षा वन पाये जाते हैं | यह घने जंगलों का क्षेत्र होता है| यहाँ मरूस्थल की कल्पना नहीं की जा सकती है|विषुवत रेखा पर उष्णकटिबंधीय निम्न वायुदाब का क्षेत्र पाया जाता है |
  • पृथ्वी पर 30-40 उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांशों के मध्य उपोष्ण जलवायु का क्षेत्र होता है | इसे उच्च वायुदाब का क्षेत्र भी कहते हैं, क्योंकि यहाँ हवाएं नीचे की ओर बैठती हैं|उपोष्ण उच्चवायु दाब के क्षेत्र में वर्षा नहीं होती है इसका कारण यह है किधरातल पर नीचे की ओर उतरने वाली हवाएं वर्षा नहीं करती हैं|
  • पृथ्वी पर 30-40अक्षांश के मध्य के क्षेत्र सबसे शुष्क होते हैं |चूँकि 30-40अक्षांशों के बीच वर्षा नहीं होती है इसलिए उपोष्ण उच्च वायुदाब के क्षेत्र में महाद्वीपों के जो भी भूभाग आते हैं, वे सूखे रह जाते है|वर्षा नही होने के कारणइन क्षेत्रों में मरूस्थल का विकास हो जाता है |विश्व के सभी मरूस्थल 30-40 अक्षांशों के मध्य पाये जाते हैं |
  • महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर हमेशा ठण्डी जलधारा तथा महाद्वीपों के पूर्वी तटों पर गर्मजलधारा का प्रवाह होता है |
  • महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर ठण्डी जलधारा प्रवाहित होती है जिसके कारण पश्चिमी तटों पर प्रवाहित होने वाले जल का वाष्पीकरण नहीं हो पाता है |जल का वाष्पीकरण नही होने के कारण महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर वर्षा नहीं हो पाती है |यही कारण है कि महाद्वीपों के पश्चिमी भाग में मरूस्थलों का विकास हुआ है |
  • विश्व के मरुस्थलों तथा उनसे सम्बंधित देशों का विवरण निम्न्नलिखित है –
मरूस्थलसम्बन्धित देश
गोबी का मरूस्थलचीन और मंगोलिया
तकलामाकनचीन
थार का मरूस्थलभारत एवं पाकिस्तान
काराकुमतुर्कमेनिस्तान
काइजिलकुलउज्बेकिस्तान
दस्त-ए-लुटईरान
दस्त-ए-कबीरईरान
नाफूदसंयुक्त अरब अमीरात
हमदसंयुक्त अरब अमीरात
रब-अल-खालीसंयुक्त अरब अमीरात
लीबियासहारा
नूबियनसहारा
कालाहारीबोत्सवाना
नामीबनामीबिया
ग्रेट बेसिनसंयुक्त राज्य अमेरिका
सोनोरनसंयुक्त राज्य अमेरिका और मैक्सिको
आटाकामचिली
पैंटागोनियाअर्जेंटीना
ग्रेट विक्टोरियाऑस्ट्रेलिया
ग्रेट सैंडीऑस्ट्रेलिया
गिबसन, सिम्पसनऑस्ट्रेलिया
बार्बटनऑस्ट्रेलिया
  • विश्व के मरुस्थलों में सर्वाधिक जनसंख्या का घनत्व थार मरूस्थल में पाया जाता है |
  • काराकुम मरूस्थल और काइजिलकुम मरूस्थल कैस्पियन सागर झील के पश्चिम में स्थित है |
  • कैस्पियन सागर के दक्षिण में ईरान स्थित है| यहाँ दस्त-ए-लुट और दस्त-ए-कबीर नामक मरुस्थलों का विस्तार है |
  • लाल सागर के उत्तर में अरब का प्रायद्वीप स्थित है| अरब प्रायद्वीप विश्व का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है | अरब प्रायद्वीप पूरी तरह से मरूस्थलीय है|इस प्रायद्वीप का सबसे बड़ा देश सउदी अरब है | अरब प्रायद्वीप में पेट्रोलियम का विशाल भण्डार संचित है |
  • अफ्रीका महाद्वीप का लगभग सम्पूर्ण उत्तरी भाग मरूस्थलीय है | अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर में सहारा का मरूस्थल स्थित है | सहारा विश्व का सबसे बड़ा मरूस्थल है |
  • सहारा मरूस्थल में दो छोटे-छोटे मरूस्थल स्थित हैं, जो निम्नलिखित हैं –
(i)     लीबिया का मरूस्थल (ii)    नूबियन का मरूस्थल
  • हॉर्न ऑफ अफ्रीका के देशों में सोमालिया एक प्रमुख देश है |इसे सोमाली मरूभूमि या सोमालिया का मरूस्थल भी कहते हैं |
  • अफ्रीका महाद्वीप के दक्षिण में दो मरूस्थल स्थित हैं –
(i)     कालाहारी मरूस्थल (ii)    नामीब मरूस्थल  
  • नामीब मरुस्थल नामीबिया में स्थित है |कालाहारी मरुस्थल मुख्य रूप से बोत्सवाना में स्थित है |किन्तु इसका विस्तार तीन देशों बोत्सवाना, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका में है | कालाहारी मरूस्थल का प्रमुख जीव शुतुरमुर्ग है |
  • उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में दो मुख्य मरूस्थल स्थित हैं –
(i)     ग्रेट बेसिन का मरूस्थल (ii)    सोनोरन मरूस्थल  
  • सोनोरन मरूस्थल का उत्तरी भाग संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है जबकि दक्षिणी भाग मैक्सिको में स्थित है |
  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीप पर दो प्रमुख मरूस्थल स्थित हैं –
(i)     आटाकामा मरूस्थल (ii)    पैंटागोनिया मरूस्थल  
  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के पश्चिमी तट पर उत्तर से लेकर दक्षिण तक एण्डीज पर्वत का विस्तार है | एण्डीज पर्वत के पूर्व में विषुवत रेखा के साथ-साथ सदाबहार वर्षा वन पाये जाते हैं | यहाँ से विश्व की सबसे बड़ी नदी प्रवाहित होती है, इसे अमेजन नदी कहते हैं |
  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीप पर वर्षा एण्डीज पर्वत के पूर्व में विषुवत रेखा के आस-पास ही होती है और एण्डीज पर्वत के पश्चिम का क्षेत्र पूरी तरह से सूखा रह जाता है | इसका एक कारण यह भी है कि एण्डीज के पश्चिम में पेरू की ठण्डी जलधारा प्रवाहित होती है |
  • दक्षिण अमेरिका महाद्वीप परएण्डीज पर्वत के पश्चिम में आटाकामा मरुस्थल का विकास हुआ है| आटाकामा मरुस्थल चिली के उत्तरी भाग में स्थित है| आटाकामा मरूस्थल में एक अरीका नामक स्थान है | अरीका दुनिया का सबसे शुष्कतम स्थल है | पैंटागोनिया का पठार अर्जेंटीना में स्थित है |
  • आस्ट्रेलिया में वर्षा ग्रेट डिवाडिंग रेंज के पूर्वी ढाल पर होती है| ग्रेट डिवाडिंग रेंज को पश्चिम की तरफ बढ़ने पर वर्षा की मात्रा घटती जाती है |
  • आस्ट्रेलिया महाद्वीप के पश्चिम में आस्ट्रेलिया की ठण्डी जलधारा प्रवाहित होती है |ठण्डी जलधारा प्रवाहित होने के कारण यहाँ वर्षा नहीं हो पाती है|अत: आस्ट्रेलिया का पश्चिमी भाग पूरी तरह से मरुस्थलीय है |
  • आस्ट्रेलिया के मरूस्थल में छोटे-छोटे कई मरूस्थल स्थित हैं|जैसे-ग्रेट विक्टोरिया, ग्रेट सैंडी, गिब्सन, सिम्पसन बार्बटन, स्टुअर्ट आदि |
   

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SITESH KUMAR August 20, 2020, 9:06 pm

Bhut accha sir 🙏🙏

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Pushkar Singh August 6, 2020, 8:30 pm

sir i dont have words to thank you sir. u r doing a great job sir.