सौरमंडल

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  • पिछले अध्याय में बताया गया है कि अनुमानत: 15 अरब वर्ष पूर्व सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक पिंड के समान संकेन्द्रित था | अत्यधिक संकेन्द्रण के कारण इस पिंड में विस्फोट हो गया जिससे इस पिंड के अनेक कण अंतरिक्ष में बिखर गये|इन असंख्य कणों से ही असंख्य आकाशगंगा का निर्माण हुआ है | एक आकाशगंगा में अनुमानित 100 अरब तारे हैं | हमारी आकाशगंगा जिसमें सूर्य अवस्थित है, इसे हम मंदाकिनी कहते हैं |
  • सूर्य भी आकाशगंगा में अनेक तारों के समान ही एक तारा है | अन्य तारों की भांति ही सूर्य के अपार ऊर्जा एवं ऊष्मा का श्रोत नाभिकीयसंलयन की क्रिया है |
  • सूर्य का वह भाग जो हमें दिखाई देता है उसे हम प्रकाशमण्डल (Photosphere) कहते हैं | प्रकाशमण्डल से विद्युत चुम्बकीय विकिरण निकलती हैं|
  • प्रकाश स्वयं एक विद्युत चुम्बकीय विकिरण है|जब सूर्य से निकलने वाली ज्वालायें शक्तिशाली होकर सूर्य की गुरूत्वाकर्षण शक्ति को पार करके बाहर निकल जाती हैं, तब ऐसी ज्वालाओं अथवा परमाणु आँधियों को सौर ज्वाला (Solar Flares)कहते हैं |
  • सौर ज्वाला(Solar Flares)अत्यन्त शक्तिशाली विद्युतचुम्बकीय विकिरण है|यह विकिरण सूर्य के बाहरी सतह अर्थात प्रकाशमण्डल (Photosphere) से उत्पन्न होती है | यह विकिरण कभी-कभी पृथ्वी के वायुमण्डल में भी प्रवेशकर जाता है |
  • पृथ्वी के उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुवों पर गुरूत्वाकर्षण बल अधिक होता है इसलिए सूर्य से मुक्त हुए विद्युत चुम्बकीय विकिरण पृथ्वी के ध्रुवों पर खींचे चले आते हैं |जब ये विद्युत चुम्ब्बकीय विकिरण पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करती हैं तो इनसे रंग-बिरंगे प्रकाश किरणें उत्पन्न होती हैं |
  • ऐसे रंग-बिरंगे प्रकाश जो ध्रुवों पर उत्पन्न होता है, उन्हें हम अरोरा लाइट (AuroraLight) कहते हैं|पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव पर इसे अरोरा बोरियालिस और दक्षिणी ध्रुव पर इसे अरोरा आस्ट्रेलिस कहते हैं |
  • सूर्य के प्रकाशमण्डल (Photosphere) से जब विद्युत चुम्बकीय विकिरण निकलती है तो उस स्थान पर काले रंग का धब्बा बन जाता है |ऐसे काले धब्बे को सौर कलंक(Sun Spot) कहते है | सौर कलंक स्थायी नहीं होता है बल्कि यह समय-समय पर बनता और बिगड़ता रहता है |
सूर्य
सूर्य
  • सौर कलंक के बनने और बिगड़ने की अवधि 11 वर्षों की होती है | इस अवधि को सौर कलंक चक्र कहते हैं |
  • विद्युत चुम्बकीय विकिरण जब पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करता है तो वह पृथ्वी पर बेतार संचार तंत्र को प्रभावित करता है |
  • सूर्य का वह बाहरी भाग जो सूर्य ग्रहण के समय दिखाई देता है, उसे हम कोरोना (Corona) कहते हैं |
  • पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी लगभग 98 करोड़किलोमीटर है |
  • सूर्य के सतह (Photosphere) का तापमान 60000Cहै लेकिन सूर्य का सबसे ज्यादा तापमान सूर्य के केन्द्र में पाया जाता है | सूर्य के केन्द्र का तापमान 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस है |
  • किसी भी तारे की संभावित जीवन अवधि अनुमानत: 10 बिलियन वर्ष है |सूर्य की अनुमानत: आयु 5 अरब वर्ष है |
  • सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश आने में 8 मिनट 16 सेकण्ड का समय लगता है |
  • जिस प्रकार प्रकाश वर्ष ब्रह्माण्डीय दूरी मापने की इकाई है, उसी प्रकार पारसेक पैमाने से भी ब्रह्माण्ड की दूरी मापा जाता है|1 पारसेक में 3.26 प्रकाश वर्ष होता है | इस प्रकार ब्रह्माण्ड की दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई पारसेक है |
  • ग्रहों का न तो अपना प्रकाश होता है और न ही ऊर्जा होती है | ग्रह सूर्य के प्रकाश से ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं | पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश के कारण ही जीवन सम्भव हुआ है|पृथ्वी अब तक की एकमात्र ज्ञात ग्रह है जिस पर जीवन है
  • पृथ्वी पर विद्यमान समस्त ऊर्जा चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो उसका एकमात्र स्रोत सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली ऊर्जा है |
  • सूर्य के चारो तरफचक्करलगाने वाले आठ ग्रह हैं जिनका सूर्य से दूरी के आधार पर क्रम इस प्रकार है–बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरूण और वरुण |
  • सूर्य से दूरी के आधार पर सबसे दूर स्थित ग्रह वरुण तथा सबसे नजदीक का ग्रह बुध है | पृथ्वी सूर्य से तीसरी सबसे नजदीक स्थित ग्रह है |
  • आकार के आधार पर सौरमण्डल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति तथा सबसे छोटा ग्रह बुध है |
  • पृथ्वी आकार के आधार परसौरमण्डल का पाँचवा सबसे बड़ा ग्रह है | पृथ्वी और शुक्र के आकार में लगभग समानता है इसलिए शुक्र को पृथ्वी की बहन कहा जाता है |
  • सूर्य के समीप स्थितग्रह जैसे – बुद्ध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल भारी पदार्थों से निर्मित हैं|इन ग्रहों का घनत्व भी अपेक्षाकृत अधिक होता है तथा ये ग्रह आकार में छोटे हैं | शेष बाद के चार ग्रह जैसे – बृहस्पति, शनि, अरूण और वरुण हल्के पदार्थों के बने हैं| इन ग्रहों का घनत्व कम है और ये ग्रह अपेक्षाकृत बड़े हैं |
सौरमंडल
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  • सूर्य के समीप स्थित ग्रह जैसे- बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल को आन्तरिक ग्रह जबकि सूर्य से दूर स्थित ग्रह जैसे-बृहस्पति, शनि, अरूण और वरुण को बाह्य ग्रह कहते हैं|
  • अधिकांश ग्रह पश्चिम से पूर्व कीदिशा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं जबकि शुक्र और अरूण सूर्य की परिक्रमा पूर्व से पश्चिम की दिशा मेंकरते हैं |
  • सौरमण्डल के सभी ग्रहों के पास अपना उपग्रह है किन्तु बुध और शुक्र ऐसे ग्रह हैं जिसका अपना कोई उपग्रह नहीं हैं | पृथ्वी के एकमात्र उपग्रह का नाम चन्द्रमा है |उपग्रह ऐसे पिंड होते हैं, जो ग्रहों के चारो ओर परिक्रमा करते हैं |
  • मंगल ग्रह के पास दो उपग्रह हैं जिन्हें फोबोस और डिमोस कहते है |मंगल ग्रह का उपग्रह डिमोस पूरे सौरमण्डल का सबसे छोटा उपग्रह है |
  • बृहस्पति का सबसे बड़ा उपग्रह गैनिमीड है | गैनिमीड न केवल बृहस्पति का सबसे बड़ा उपग्रह है बल्कि यह पूरे सौरमण्डल का सबसे बड़ा उपग्रह है |
  • सौर मण्डल में सबसे ज्यादा उपग्रहों की संख्या बृहस्पति के पास हैं |बृहस्पति के कुल 79 उपग्रह हैं |
  • शनि के कुल 62 उपग्रह हैं | शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टिटॉन(Titan)है |
  • शनि की सबसे रहस्यमयी विशेषता उसके चारों तरफ विद्यमान वलय है | इसकी संख्या 7 है | शनि के चारों तरफ विद्यमान तस्तरीनुमा वलय धूलकणों से निर्मित हैं | ये शनि के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण इसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं |
  • अरूण ग्रह के कुल 27 उपग्रह हैं| अरूण के आस-पास भी वलय विद्यमान है| अरूण के पास विद्यमान वलयों की संख्या 5 है |
  • वरुण के 14 उपग्रह हैं|इनमें ट्रिटोनऔर मेरीड प्रमुख हैं |
  • सभी ग्रहों का अपना वायुमण्डल है किन्तु बुध के पास वायुमण्डल नहीं है|वायुमण्डल न होने के कारण बुध दिन में अत्यधिक गर्म और रातों में अत्यधिक ठण्डा हो जाता है| इस असमान दशाओं के कारण बुध ग्रह पर जीवन सम्भव नहीं है |
  • वायुमण्डल के कारण ही पृथ्वी पर जीवन सम्भव हो सका है | सूर्य से आने वाली ऊष्मा लघु तरंगीय होती हैं जिसके कारण वायुमण्डल इन्हें रोक नहीं पाता है|ये ऊष्मा धरातल को गर्म कर देती हैं | किन्तु धरातल से निकलने वाली ऊष्मा दीर्घतरंगीय होती है |ऊष्मा के दीर्घ तरंगीय होने के कारण रात में वायुमण्डल उसे अन्तरिक्ष में नहीं जाने देता है |अत: वायुमण्डल सूर्य के लघु तरंगीयविकिरण के लिए पारगम्य है लेकिन धरातल से निकलने वाले दीर्घ तरंगीयविकिरण के लिए पारगम्य नहीं है |
  • वायुमण्डल में कार्बनडाई आक्साइड ही ऐसी गैस है जो धरातल से निकलने वाले दीर्घ तरंगीय विकिरण को अवशोषित कर लेती है | जिसके कारण पृथ्वी पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियां बनी रहती हैं |

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SITESH KUMAR July 11, 2020, 3:03 pm

Thanks sir

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Dharmendra July 5, 2020, 10:17 pm

Are bhaiyon ydi yha option nhi download ka to aap apne Google Chrome ke downloader se download krr lo na

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Saroj Kumar July 4, 2020, 3:34 pm

Pdf apload nahi ho raha hai sir Please sir Bihar si mains exam hai Please sir help kijiye sir

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Hutendra pratap singh June 30, 2020, 5:18 pm

Sir downlod ka option do

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Shrihari mishra June 27, 2020, 6:18 pm

Sir ji mighe complete note world and indian geography ka chahiye